बंदी छोड़ दिवस पर ग्वालियर में स्वर्गीय सरदार ज्ञानी इंदर सिंह जी की सेवा-विरासत को मिला विशेष सम्मान
विशिष्ट व्यक्तियों में शामिल कर गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ कार सेवा कमेटी ने किया नमन; पीढ़ियों से समाज और संगत की सेवा कर रहा परिवार
ग्वालियर। सिख इतिहास की गौरवशाली परंपरा, त्याग, न्याय और मानवता की भावना के प्रतीक बंदी छोड़ दिवस के पावन अवसर पर स्वर्गीय सरदार ज्ञानी इंदर सिंह जी की धार्मिक एवं सामाजिक सेवाओं को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ कार सेवा कमेटी द्वारा आयोजित इस सम्मान ने उनके जीवनभर के सेवा-समर्पण और सिख समाज के प्रति उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
स्वर्गीय सरदार ज्ञानी इंदर सिंह जी को सम्मान मिलना उनके सेवाभावी जीवन और समाज में उनके योगदान का गौरवपूर्ण स्मरण है। उनकी ओर से यह सम्मान उनके ज्येष्ठ सुपुत्र सरदार सुरिंदर पाल सिंह जी ने ग्रहण किया। परिवार के लिए यह क्षण भावनात्मक गौरव, कृतज्ञता और अपने पूर्वजों के संस्कारों को नमन करने का अवसर बना।
### बंदी छोड़ दिवस की ऐतिहासिक धरती से जुड़ी सेवा-परंपरा
ग्वालियर की ऐतिहासिक धरती सिख इतिहास में विशेष स्थान रखती है। सिख परंपरा के अनुसार, छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ग्वालियर किले से अपनी मुक्ति के साथ वहाँ बंदी बनाए गए 52 राजाओं की रिहाई भी सुनिश्चित की थी। यह ऐतिहासिक प्रसंग बंदी छोड़ दिवस को स्वतंत्रता, न्याय, त्याग और दूसरों के अधिकारों के लिए खड़े होने की प्रेरणा प्रदान करता है।
इसी पावन परंपरा से जुड़े ग्वालियर में स्वर्गीय सरदार ज्ञानी इंदर सिंह जी की सेवाओं का सम्मान विशेष अर्थ रखता है। उनका जीवन भी धार्मिक आस्था, गुरुद्वारों की सेवा, सामुदायिक सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से जुड़ा रहा।
### पंजाब से ग्वालियर तक का सफर, परिश्रम और सेवा की मिसाल
स्वर्गीय सरदार ज्ञानी इंदर सिंह जी का जन्म वर्ष 1920 में पंजाब के जिला अमृतसर के गाँव निब्बर में सरदार पाल सिंह जी के परिवार में हुआ था। वर्ष 1952 में वे मोहना, ग्वालियर क्षेत्र आए और कृषि कार्य से जुड़े। लगभग दस वर्षों तक खेती करने के बाद, वर्ष 1962 में ग्वालियर शहर आकर उन्होंने पेट्रोल पंप एवं ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई।
व्यावसायिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी धार्मिक और सामाजिक सेवा उनके जीवन का अभिन्न अंग बनी रही। 1968 बाबा उत्तम सिंह जी के साथ उन्होंने गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ किला, ग्वालियर की कार सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त, गुरुद्वारा फूल बाग, लश्कर तथा मोहना में भी गुरुद्वारे से जुड़े सेवा कार्यों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही। गुरुद्वारा फूल बाग में लंबे समय तक सेवा करते हुए उन्होंने संगत के बीच सम्मान और विश्वास अर्जित किया।
# बंदी छोड़ दिवस पर ग्वालियर में स्वर्गीय सरदार ज्ञानी इंदर सिंह जी की सेवा-विरासत को मिला विशेष सम्मान
गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ कार सेवा कमेटी ने किया नमन; पीढ़ियों से समाज और संगत की सेवा कर रहा परिवार
सिख समाज के लोगों को जब डाकुओं में अगवाह किया तो बाबा उद्गम सिंह जी के साथ मिलकर बड़ी दलेरी से सिखों को डाकुओं से छुड़वाया ।
1984 के दंगों में सिख समाज के कठिन दौर में भी वे अपने समुदाय के साथ दृढ़ता से खड़े रहे। उनका जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि वास्तविक प्रतिष्ठा केवल व्यावसायिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज, धर्म और जरूरतमंदों के प्रति निभाए गए कर्तव्यों से निर्मित होती है।
### परिवार आज भी आगे बढ़ा रहा है सेवा की विरासत
स्वर्गीय सरदार ज्ञानी इंदर सिंह जी द्वारा स्थापित सेवा और समर्पण की परंपरा आज भी उनका परिवार आगे बढ़ा रहा है। सरदार सुरिंदर पाल सिंह, जे.पी. सिंह, गुरदीप सिंह, के.जे. सिंह और सरदार सर्वजीत सिंह ज्ञानी सहित परिवार के सदस्य व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक एवं जनसेवा के कार्यों में सक्रिय हैं।
परिवार के सदस्य सरदार सर्वजीत सिंह ज्ञानी, रेड क्रॉस चेयरमैन के रूप में सामाजिक सेवा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। वहीं, परिवार की बहू नीरू सिंह ज्ञानी भी सामाजिक सरोकारों और जनसेवा के कार्यों के माध्यम से इस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की स्मृति का सम्मान नहीं, बल्कि उन संस्कारों, मूल्यों और सेवा-भावना का सम्मान है, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होते हुए समाज को सकारात्मक दिशा देते हैं।
### “उनकी सेवा और संस्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे”
इस अवसर पर सरदार सर्वजीत सिंह ज्ञानी ने कहा कि परिवार के लिए यह सम्मान गर्व, भावनात्मक जुड़ाव और कृतज्ञता का क्षण है। उन्होंने कहा, “स्वर्गीय सरदार ज्ञानी इंदर सिंह जी ने अपने जीवन से हमें सिखाया कि वास्तविक प्रतिष्ठा समाज, संगत और जरूरतमंदों की सेवा करने में है। उन्होंने धार्मिक आस्था, परिश्रम और सामाजिक उत्तरदायित्व को सदैव महत्व दिया। बंदी छोड़ दिवस जैसे पावन अवसर पर उनकी सेवाओं का स्मरण हमारे परिवार के लिए विशेष गौरव का विषय है। उनके संस्कार और सेवा-भावना आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।”
गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ कार सेवा कमेटी द्वारा प्रदान किया गया यह सम्मान स्वर्गीय सरदार ज्ञानी इंदर सिंह जी के सेवा-समर्पित जीवन के प्रति श्रद्धांजलि है। साथ ही, यह संदेश भी देता है कि निःस्वार्थ सेवा से अर्जित सम्मान समय के साथ समाप्त नहीं होता, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर जीवित रहता है।