आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर ने न्यूरोलाॅजिस्ट डाॅ. योगेश्वर विद्याधर कालकोंडे को बादशाह खान स्मृति अलंकरण से नवाजा


- आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में 10वां बादशाह खान स्मृति व्याख्यान और बादशाह खान सम्मान-2026 का किया गया आयोजन

- भारत को आगे लाना है तो हमें देहातों की ओर जाना होगाः डाॅ. योगेश्वर विद्याधर कालकोंडे

- गांधी के सिद्धांतों को जीवन में अपनाकर ही समाज की समस्याओं का समाधान संभवः चांसलर श्रीमती रुचि सिंह जी

- बादशाह खान का जीवन केवल स्वतंत्रता आंदोलन का अध्याय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक पुनरोत्थान, शिक्षा, अहिंसा और मानवीय मूल्यों की एक महत्वपूर्ण यात्रा भी हैः प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय

- भारतीय ज्ञान परंपरा के कार्यक्रमों पर आधारित कैलेंडर‘ का हुआ विमोचन
ग्वालियर ।  आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती के अवसर पर 10वां बादशाह खान स्मृति व्याख्यान और बादशाह खान सम्मान-2026 का आयोजन किया गया। संस्थान के तुरारी परिसर स्थित उस्ताद अलाउद्दीन खान सभागार में आयोजित व्याख्यान के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ. योगेश्वर विद्याधर कालकोंडे (पब्लिक हेल्थ प्रैक्टिशनर एंड न्यूरोलाॅजिस्ट) शामिल हुए। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर की चांसलर श्रीमती रुचि सिंह जी, प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चौहान, वाइस चांसलर प्रोफेसर योगेश उपाध्याय, रजिस्ट्रार डाॅ. ओमवीर सिंह, डीन अकेडमिक डाॅ. रंजीत सिंह तोमर, आईटीएम ग्वालियर की निदेशक डाॅ. मीनाक्षी मजूमदार मंचासीन रहीं। इस दौरान विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, डीन, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, ग्वालियर शहर से आये गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में युवा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक त्रिपाठी द्वारा किया गया।
बादशाह खान का जीवन केवल स्वतंत्रता आंदोलन का अध्याय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक पुनरोत्थान, शिक्षा, अहिंसा और मानवीय मूल्यों की एक महत्वपूर्ण यात्रा भी हैः प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
महात्मा गांधी जी की जयंती के अवसर पर 10वां बादशाह खान स्मृति व्याखयान और बादशाह खान सम्मान-2026 में स्वागत उद्बोधत देते हुए आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय ने सभी का स्वागत अभिनंदन किया। उन्होंने अपने संबोधन को तीन हिस्सों में विभाजित करते हुए पहले आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर, फिर बादशाह खान और अंत में उनके विचारों की आज के समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर अपने अनूठे कार्यों और ऐसी परंपराओं के लिए जानी जाती है, जिनके माध्यम से समाज और देश के उन महत्वपूर्ण किरदारों को याद किया जाता है, जिन्हें समय के साथ हम कहीं न कहीं भुला चुके हैं। भारत की आजादी और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में कई ऐसे महान व्यक्तित्व रहे हैं, जिनकी भूमिका केंद्रीय रही, लेकिन आज वे इतिहास के हाशिये पर पहुंच गए हैं। ऐसे व्यक्तित्वों को याद करना केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि अपनी सामाजिक चेतना और दृष्टि को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि अतीत के ऐसे किरदारों और विचारों को याद करने से हमारी गति थोड़ी धीमी हो जाती है, लेकिन वास्तव में इससे हमारा स्तर, देखने का नजरिया और    दूरदृष्टि बढ़ती है। हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि समाज किन मूल्यों और विचारों के आधार पर आगे बढ़ा है। प्रो. डॉ. उपाध्याय ने कहा कि भारत रत्न अब्दुल गफ्फार खान को बादशाह खान और ‘फ्रंटियर गांधी’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि बादशाह खान के जीवन और विचारों को समझने के लिए उन पर लिखी गई पुस्तकों का अध्ययन महत्वपूर्ण है। उन्होंने उनके सचिव प्यारेलाल जी द्वारा लिखी गईं पुस्तकों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बादशाह खान का जीवन केवल स्वतंत्रता आंदोलन का अध्याय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक पुनरोत्थान, शिक्षा, अहिंसा और मानवीय मूल्यों की एक महत्वपूर्ण यात्रा भी है। ऐसे व्यक्तित्वों को स्मरण करने का उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ना और यह समझाना है कि समाज में परिवर्तन केवल गति से नहीं, बल्कि सही दिशा और दूरदृष्टि से भी आता है।

पब्लिक हेल्थ प्रैक्टिशनर एंड न्यूरोलाॅजिस्ट डाॅ. योगेश्वर विद्याधर कालकोंडे को प्रदान किया बादशाह खान स्मृति अलंकरण
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित 10वां बादशाह खान स्मृति अलंकरण समारोह के अवसर पर डाॅ. योगेश्वर विद्याधर कालकोंडे (पब्लिक हेल्थ प्रैक्टिशनर एंड न्यूरोलाॅजिस्ट) को समाजसेवा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान और प्रचार-प्रसार के लिए बादशाह खान स्मृति अलंकरण-2026 प्रदान किया गया। यह अलंकरण संस्थान की चांसलर श्रीमती रुचि सिंह जी और वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय द्वारा सीमांत गांधी अब्दुल गफ्फार खान की स्मृति में बादशाह खान अलंकरण-2026 (शाॅल, श्रीफल, अलंकरण-पत्र और एक लाख रुपये) प्रदान किया गया। इस दौरान आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर द्वारा डाॅ. योगेश्वर विद्याधर कालकोंडे  पर फिल्माया गया वीडियो भी दिखाया गया। 
इस अवसर पर ‘भारतीय ज्ञान परंपरा के कार्यक्रमों पर आधारित कैलेंडर‘ का विमोचन अतिथि द्वारा किया गया। 
तकनीक की दौड़ में मानवीय संवेदनाओं को खोने से बचना होगाः डॉ. योगेश्वर कालकोंडे
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर आयोजित 10वां बादशाह खान स्मृति व्याख्यान के अवसर पर मुख्य अतिथि डाॅ. योगेश्वर विद्याधर कालकोंडे (पब्लिक हेल्थ प्रैक्टिशनर एंड न्यूरोलाॅजिस्ट) ने कहा कि आज हम तकनीक और प्रक्रियाओं की ऐसी दौड़ में शामिल हैं, जहां धीरे-धीरे मानवीय भावनाएं पीछे छूटती जा रही हैं। हमें तकनीकी दक्षता के साथ अपनी संवेदनाओं को भी बचाकर रखना होगा। उन्होंने कहा कि मैं इसे सम्मान नहीं, बल्कि आशीर्वाद मानता हूं। आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर ने इस सम्मान के माध्यम से मुझे यहां आने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि मैं देश-विदेश की अनेक यूनिवर्सिटीज में जाता हूं, लेकिन आज मुझे यह चिंता सताती है कि कहीं हमारी शिक्षण व्यवस्था धीरे-धीरे मैकेनिकल तो नहीं होती जा रही। यही स्थिति चिकित्सा क्षेत्र में भी दिखाई दे रही है, जहां डॉक्टरों के काम में प्रक्रियाएं तो बढ़ रही हैं, लेकिन मानवीय भावनाओं के लिए जगह कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि मैं यहां लेक्चर देने नहीं, बल्कि संवाद करने आया हूं। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन के बुनियादी सवाल पूछने का आव्हान करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि ’मैं कौन हूं और मैं क्या कर रहा हूं‘। विश्वविद्यालयों का काम केवल विद्यार्थियों की क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें सवाल पूछने का अवसर देना भी है। उन्होंने घुड़दौड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि रेसकोर्स में दौड़ने वाला घोड़ा, उसका मालिक और उससे जुड़े दूसरे लोग सभी अपने-अपने स्तर पर एक अलग तरह की जिंदगी जी रहे हैं। सभी के अपने दुख हैं, फिर भी यह दौड़ लगातार चलती रहती है। ऐसे में हमें रुककर यह पूछना होगा कि हम किस तरह का जीवन जी रहे हैं और वास्तव में हमें जीवन कैसे जीना है।
भारत को आगे लाना है तो हमें देहातों की ओर जाना होगाः डाॅ. योगेश्वर विद्याधर कालकोंडे
मुख्य अतिथि डाॅ. योगेश्वर विद्याधर कालकोंडे (पब्लिक हेल्थ प्रैक्टिशनर एंड न्यूरोलाॅजिस्ट) ने अपने जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि मेरी यात्रा मुझे अमेरिका तक ले गई, जहां मैं ऐसे प्रयोगों पर काम कर रहा था जिन्हें पहले किसी ने नहीं किया था। एक प्रयोग असफल होने पर महज चार घंटे में करीब एक लाख रुपये का नुकसान हुआ। उन्हें महसूस हुआ कि भारत में प्रशिक्षित एक डॉक्टर के लिए इतनी राशि से कई मरीजों की जान बचाई जा सकती थी। इसी अनुभव ने मुझे अपने काम और उसकी सामाजिक उपयोगिता पर नए सिरे से विचार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञता कभी-कभी व्यक्ति को अपने ही दायरे का गुलाम बना देती है। केवल अपने स्पेशलाइजेशन और पैकेज के पीछे भागने के बजाय युवाओं को समाज और नागरिक होने की जिम्मेदारी भी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में ह्यूमैनिटीज और टेक्निकल शिक्षा के बीच संतुलन जरूरी है।
महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए डॉ. कालकोंडे ने कहा कि गांधी केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि आज के समय में भी प्रासंगिक हैं। गांधी हमें तीन महत्वपूर्ण बातें सिखाते हैं-’हर चीज पर प्रश्न करना, प्रयोग करना और विचारों को व्यवहार में उतारना‘। उन्होंने गांधी को प्रैक्टिसिंग फिलॉसफर के रूप में देखते हुए कहा कि इन तीनों बातों को विद्यार्थियों की शिक्षा का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सामने जलवायु परिवर्तन, एआई एंग्जायटी, पूंजीवाद और नवउदारवाद, रोजगार की कमी, सामाजिक अलगाव और चिंता जैसी अनेक चुनौतियां हैं। तकनीक से लाभ भी है और नुकसान भी, इसलिए तकनीक को अपनाते समय मानवीय पक्ष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
डॉ. कालकोंडे ने शारीरिक श्रम के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में शारीरिक श्रम का मूल्य कम होता जा रहा है, जबकि गांधीजी ने श्रम की गरिमा को समझा था। उन्होंने गांधी के विचारों में निहित आत्मसंयम, भय पर नियंत्रण, सर्वधर्म समभाव और स्वदेशी जैसे मूल्यों को आज के जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि समाज की समस्याएं जितनी बढ़ेंगी, उतना ही हमें अपने भीतर झांकना होगा। गांधी हमें भारतीय मूल्यों से जोड़ते हैं। गांधीजी कहते थे कि भारत उसके देहात गांवों में बसता है। उन्होंने कहा कि भारत को आगे लाना है तो हमें देहातों की ओर जाना होगा। 
गांधी के सिद्धांतों को जीवन में अपनाकर ही समाज की समस्याओं का समाधान संभवः चांसलर श्रीमती रुचि सिंह जी
महात्मा गांधी जी की जयंती के अवसर पर 10वां बादशाह खान स्मृति व्याखयान और बादशाह खान सम्मान-2026 में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर की चांसलर श्रीमती रुचि सिंह जी ने अवार्ड प्राप्त करने पर डाॅ. योगेश्वर विद्याधर कालकोंडे को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुझे सोपान जोशी जी ने बताया था कि डाॅ. योगश्वर ने अपने विजी शैड्यूल और कार्यक्रम को निरस्त कर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आए इसके लिए धन्यवाद देती हूं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी जी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे। गांधीजी के जीवन और दर्शन में ’अहिंसा, स्वराज, सादगी, समानता और सर्वाेदय’ जैसे मूल्य प्रमुख रहे। उन्होंने कहा कि गांधीजी का जीवन केवल विचारों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने सिद्धांतों को जीवनभर व्यवहार में उतारा। उन्होंने महात्मा गांधी के प्रिय भजन ’वैष्णव जन तो तेने कहिए, पीर पराई जाणे रे...‘ का उल्लेख करते हुए कहा कि दूसरों के दुख को अपना दुख समझना और समाज के प्रति संवेदनशील होना गांधीजी के विचारों की मूल भावना थी। आज के दौर में जब लोग अपनी सुविधाओं और हितों को प्राथमिकता देते हैं, ऐसे समय में गांधीजी का जीवन हमें त्याग, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि अब्दुल गफ्फार खान जी ने गांधी जी का अनुशरण किया। उन्होंने अपने पूरे जीवन में समाज की समस्याओं को समझने और उनके समाधान खोजने का प्रयास किया। उन्होंने परिस्थितयां चाहे जैसी भी हों, समस्याओं से मुंह मोड़ने के बजाय उनके समाधान की दिशा में काम किया। यही दृष्टिकोण आज की पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि हम गांधीजी के मूल्यों को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाएं, तो समाज की अनेक समस्याओं के समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आव्हान करते हुए कहा कि युवाओं छात्र-छात्राओं को आगे बढ़कर क्रिटिकल थिंकिंग का इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी समस्या को केवल स्वीकार करने के बजाय उसके कारणों को समझना, सवाल पूछना और सामाधान तलाशना जरूरी है। 
वहीं आईटीएम ग्वालियर की डायरेक्टर डाॅ. मीनाक्षी मजूमदार ने सभी अतिथियों और उपस्थित श्रोताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। 
 
 

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