आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस‘ विषय पर नेशनल सेमिनार का हुआ आयोजन
- एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के उपयोग की निगरानी और उसमें सुधार आवश्यक हैः डाॅ. कमला पाठक
- फार्मेसी के क्षेत्र में कॅरियर की अपार संभावनाएंः प्रोफेसर डाॅ. देवेंद्र पाठक
- छात्र-छात्राओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में उभरती चुनौतियों के प्रति सजग रहने की जरूरतः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
- छात्र-छात्राओं ने पोस्टर से लेक नुक्कड़ नाटक तक दिखाई प्रतिभा, किया स्वास्थ्य के प्रति जागरूक
ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल आफ फार्मेसी द्वारा वल्र्ड फार्मेसी-डे के उपलक्ष्य में नेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया। संस्थान के एलडीवी ब्लाॅक स्थित उस्ताद अल्लाउद्दीन खान आडिटोरियम में आयोजित इस नेशनल सेमिनार का विषय ‘इंपाॅवरिंग फार्मासिस्ट फाॅर ए हेल्यिर फ्यूचरः काॅम्बटिंग एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस फाॅर ए ‘स्वस्थ भारत‘ रहा। सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर डाॅ. कमला पाठक, ग्रेटर नोएडा उप्र और प्रोफेसर डाॅ. देवेंद्र पाठक, पलबल हरियाणा शामिल हुए। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय, डीन एकेडमिक्स डाॅ. रंजीत सिंह तोमर, स्कूल आफ फार्मेसी के डीन डाॅ. अवनीश त्रिपाठी, एचओडी नेम कुमार जैन दीप प्रज्जवलित कर इस राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ किया। इस मौके पर डाॅ. मोहम्मद यासिर, डाॅ. सुरेंद ग्रांधी, डाॅ. तीर्थंकर चौधरी , डाॅ. अंजना माले, डाॅ. रेखा रानी, प्रियंका केशरी, डाॅ. आलोक सोनी, डाॅ. नम्रता मिश्रा, डाॅ. विजेता भट्टाचार्य, आकांक्षा तिवारी, निशा वर्मा, दिव्या निरंजन, रीता शाक्य, सोमेष गोडिया सहित विभिन्न प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के उपयोग की निगरानी और उसमें सुधार आवश्यक हैः डाॅ. कमला पाठक
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल आफ फार्मेसी द्वारा वल्र्ड फार्मेसी-डे के उपलक्ष्य में आयोजित नेशनल सेमिनार में डीन डाॅ. अवनीश त्रिपाठी ने स्वागत उद्बोधन में अतिथियों, संस्थान के पदाधिकारियों, शक्षिकों एवं छात्र-छात्राओं का स्वागत किया। इसके बाद फार्मासिस्ट शपथ दिलाई गई, जिसमें मरीजों और समाज के प्रति फार्मासिस्ट की व्यावसायिक प्रतिबद्धता एवं नैतिक जिम्मेदारियों को दोहराया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रोफेसर डाॅ. कमला पाठक ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा इसके प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने एएमआर के बढ़ते खेतरे, कोविड-19 महामारी से मिले सबक तथा सूक्ष्मजीवों द्वारा एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित करने की प्रक्रिया को समझाया। उन्होंने बताया कि एएमआर के कारण उपचार विफल हो सकता है, बीमारी की अवधि बढ़ सकती है, स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है और उपचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं। उन्होंने भारतीय संदर्भ में एएमआर की चुनौती को ‘स्वस्थ भारत’ की परिकल्पना से जोड़ते हुए एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने ’एंटीबायोटिक स्टुअर्डशिप’ की आवश्यकता बताते हुए कहा कि एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के उपयोग की निगरानी और उसमें सुधार आवश्यक है, ताकि इनका उपयोग उचित एवं जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से हो। उन्होंने कहा कि एएमआर केवल मानव स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण से भी जुड़ा विषय है। इसलिए इससे निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
जेनेरिक दवाओं के उचित उपयोग को बढ़ावा देना चाहिएः प्रोफेसर डाॅ. देवेंद्र पाठक
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल आफ फार्मेसी द्वारा वल्र्ड फार्मेसी-डे के उपलक्ष्य में आयोजित नेशनल सेमिनार में वक्ता प्रोफेसर डाॅ. देवेंद्र पाठक ने फार्मासिस्टों के सशक्तीकरण और व्यावसायिक मूल्यों पर विचार रखे। उन्होंने छात्र-छात्राओं को फार्मेसी क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न अवसरों से परिचित कराया और फार्मास्युटिकल एवं हेल्थकेयर उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में करियर संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने छात्र-छात्राओं को व्यावसायिक दक्षता, नैतिक मूल्यों, बेहतर संचार कौशल और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जेनेरिक दवाओं के उचित उपयोग को बढ़ावा देने तथा मरीजों को तर्कसंगत और किफायती दवा उपयोग के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
छात्र-छात्राओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में उभरती चुनौतियों के प्रति सजग रहने की जरूरतः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
नेशनल सेमिनार में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय ने नेशनल सेमिनार के आयोजन के लिए स्कूल आफ फार्मेसी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बताते हुए जागरूकता, दवाओं के जिम्मेदार उपयोग और स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में उभरती चुनौतियों के प्रति सजग रहने और भविष्य के फार्मासिस्ट के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया।
छात्र-छात्राओं ने पोस्टर से लेकर नुक्कड़ नाटक तक दिखाई प्रतिभा, किया स्वास्थ्य के प्रति जागरूक
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में नेशनल सेमिनार के बाद छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें पोस्टर प्रतियोगिता, स्लोगन प्रतियोगिता, लीफलेट प्रतियोगिता, रील मेकिंग प्रतियोगिता, क्विज प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और जागरूकता रैली शामिल रहे। छात्र-छात्राओं ने इन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी रचनात्मकता, ज्ञान, संचार कौशल और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता का प्रदर्शन किया। समापन अवसर पर विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके बाद समूह फोटोग्राफ एवं वैलेडिक्टरी सत्र के साथ विष्व फार्मासिस्ट दिवस-2026 समारोह का समापन हुआ। वहीं अंत में प्रोफेसर डाॅ. अंजना माले द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।