आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर में आईटीएम मॉडल यूनाइटेड नेशन्स ‘मंथन-2026‘ का हुआ शुभारंभ
- भविष्य आज के युवाओं पर निर्भर करता हैः पूर्व विधायक प्रवीण पाठक
-सामाजिक बदलाव की शुरुआत खुद में बदलाव से होती हैः प्रोफेसर डॉ. आकृति भाटिया
- शांति और टिकाऊ विकास के लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी ज़रूरी हैः प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान
- आईटीएम ग्लोबल स्कूल में छात्राओं ने दी क्लासिकल डांस की प्रस्तुति
- ज्वलंत मुद्दों पर 200 बच्चों ने की डिबेट, समस्याओं का समाधान ढूंढा
ग्वालियर । नेशन्स मंथन-2026‘ (आईटीएम एमयूएन मंथन-2026) कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। संस्थान के तुरारी परिसर स्थित उस्ताद अलाउद्दीन खां ऑडिटेरियम में आयोजित कॉन्फ्रेंस के 8वें संस्करण में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक प्रवीण पाठक और विशिष्ट अतिथि के रूप में जेएनयू दिल्ली से आईं प्रोफेसर डॉ. आकृति भाटिया और आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान शामिल हुए। इस अवसर पर आईटीएम ग्लोबल स्कूल की प्रिंसिपल गीता एस., डीन अकडेमिक अनीता मित्तल, सीएओ रेनू अग्रवाल, सहित सभी शिक्षक, स्टूडेंट्स और पैरेंट्स मौजूद रहे।
भविष्य आज के युवाओं पर निर्भर करता हैः पूर्व विधायक प्रवीण पाठक
आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर में आईटीएम एमयूएन मंथन-2026 के 8वें संस्करण के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने कहा कि यह एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जो क्रिटिकल थिंकिंग, लीडरशिप, डिप्लोमेसी, कम्युनिकेशन और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स को विकसित करता है। उन्होंने बच्चों को उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे जंगल में हर जानवर की जरूरतें अलग-अलग होती हैं, वैसे ही हर देश को आबादी, बेरोजगारी, कर्ज, राजनीकि अस्थिरता, आतंकवाद और जलवायु से जुड़ी समस्याओं जैसी अनोखी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। एमयूएन छात्र-छात्राओं को इन अलग-अलग नजरियों को समझने और शांतिपूर्ण समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करना सिखाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत और सहयोग के जरिए भविष्य के टकरावों को रोकने के लिए ही दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूनाइटेड नेशन्स की स्थापना की गई थी। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं को पुरस्कार जीतने के बजाय सीखने, ध्यान से सुनने, समस्याओं को समझने और सोच-समझकर समाधान पेश करने पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि भविष्य आज के युवाओं पर निर्भर करता है, जिन्हें ऐसे ज़िम्मेदार ग्लोबल सिटिज़न बनना चाहिए जो समझदारी, सहानुभूति और सहयोग के साथ उभरती चुनौतियों का सामना कर सकें।
सामाजिक बदलाव की शुरुआत खुद में बदलाव से होती हैः प्रोफेसर डॉ. आकृति भाटिया
आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर में आईटीएम एमयूएन मंथन-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं डॉ. आकृति भाटिया ने यूनाइटेड नेशन्स (यूएन) की अहमियत के बारे में बताते हुए कहा कि एमयूएन सिर्फ बहस करने से कहीं ज्यादा है। यह गवर्नेंस को समझने और ग्लोबल मुद्दों को सुलझाने के बारे में है। उन्होंने छह ज़रूरी स्किल्स पर ज़ोर देते हुए कहा कि ध्यान से सुनना, सवाल पूछना, क्रिटिकल सोच रखना, कनेक्शन बनाना, साफ़-साफ़ बोलना और समस्याओं को हल करना। उन्होंने कहा कि यूनेस्को, यूएनडीपी, आईएलओ और यहाँ तक कि लोकसभा जैसे संगठन भी गवर्नेंस के ज़रिए जुड़े हुए हैं। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन (आईएलओ) मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा करने और बाल मज़दूरी को खत्म करने के लिए काम करता है। उन्होंने कहा कि युद्ध से किसे फ़ायदा होता है और इसकी कीमत कौन चुकाता है। एआई और टेक्नोलॉजी पर चर्चा करते हुए उन्होंने डेटा प्राइवेसी, गिग वर्कर्स और डिलीवरी वर्कर्स व महिला कर्मचारियों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में चिंता जताई। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि टेक्नोलॉजी का फ़ायदा सभी को बराबर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक बदलाव की शुरुआत खुद में बदलाव से होती है इसलिए ऐसे नागरिक बनें जो सवाल पूछें, क्रिटिकल सोच रखें और दुनिया में जो बदलाव देखना चाहते हैं, उसे खुद अपनाए।
शांति और टिकाऊ विकास के लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी ज़रूरी हैः प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान
आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर में आईटीएम एमयूएन मंथन-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान ने कहा कि इतिहास में हमेशा से इंसानों ने एक-दूसरे का शोषण किया और न्याय व मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष आज भी जारी है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना शांति को बढ़ावा देने और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए की गई थी, लेकिन टकराव आज भी मौजूद हैं। उन्होंने 17 सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजीएस) पर ज़ोर देते हुए कहा कि अगर देश ईमानदारी से इन्हें लागू करें, तो दुनिया ज्यादा शांतिपूर्ण, समान और टिकाऊ बन सकती है। उन्होंने कहा कि शांति और टिकाऊ विकास के लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी ज़रूरी है। लोगों को बिना किसी डर के अपनी राय रखने, सवाल पूछने और सार्थक बातचीत करने में सक्षम होना चाहिए। महात्मा गांधी का ज़िक्र करते हुए, वे छात्र-छात्राओं को उनके सत्य, अहिंसा और खुली बातचीत के सिद्धांतों से सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वे उन्हें याद दिलाते हैं कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा बढ़ावा दिए जाने वाले कई मूल्य लंबे समय से भारत की विरासत का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एमयूएन प्रतिनिधियों से आग्रह करता हूं कि वे आलोचनात्मक सोच रखें, ध्यान से सुनें, जिम्मेदारी से बोले, अलग-अलग नजरियों का सम्मान करें और ऐसे नैतिक नेता बनें जो एक बेहतर और ज्यादा शांतिपूर्ण दुनिया बनाने में योगदान दें।
आईटीएम ग्लोबल स्कूल में छात्राओं ने दी क्लासिकल डांस की प्रस्तुति
आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर द्वारा तीन दिवसीय आईटीएम एमयूएन मंथन-2026 में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 200 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर मां सरस्वति की प्रतिमा पर दीप प्रज्जवल के साथ किया गया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद आईटीएम ग्लोबल स्कूल की प्रिंसिपल गीता एस. ने वेैदिक श्लोक गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु, गुरुर देवो महेश्वर, गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः के साथ स्वागत भाषण देते हुए अतिथियों का स्वागत किया। वहीं सेक्रेटरी जर्नल वान्या, डायरेक्टर जर्नल पलाक्षा ने स्पीच दी। इसके बाद एमयूएम वीडियो प्रजेंटेशन हुआ। कार्यक्रम में छात्राओं ने क्लासिकल डांस की प्रस्तुति दी।
ज्वलंत मुद्दों पर 200 बच्चों ने की डिबेट, समस्याओं का समाधान ढूंढा
आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर द्वारा तीन दिवसीय आईटीएम एमयूएन मंथन-2026 में 200 बच्चों ने विभिन्न प्रतिनिधियों की भूमिका का बखूबी निर्वहन किया। इस अवसर पर आठ कमेटियां बनाई गई थीं, जिनमें यूएनएससी (यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल), यूएनईपी (यूनाइटेड नेशन्स इन्वायरमेंट प्रोग्राम), यूएन रिव्यू कमेटी, यूएनएचआरसी (यूनाइटेड नेशन्स ह्यूमन राइट्स काउंसिल), लोक सभा (एलएस), कंट्यूनुअस ऑल इंडिया (सीएआई), इंटरनेशनल प्रेस (आईपी) और इंटरनेशनल फोटोग्राफी शामिल हैं। इन कमेटियों में प्रतिनिधियों ने शामिल होकर कूटनीति, संवाद और विकास और ज्वलंत मुद्दों पर डिबेट कर समस्याओं का समाधान ढूंढा।