पारस की हार के बाद व्हाईट हाउस सदमे में, टूट की संभावना
ग्वालियर। मप्र चेंबर आफ कामर्स के चुनावों में अध्यक्ष पद पर व्हाईट हाउस की करारी शिकस्त के बाद व्हाईट हाउस टूट सकता है। यह टूट व्हाईट हाउस के कोर प्रमुखों की मनमानी व तानाशाही के कारण हो सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि व्हाईट हाउस से कई प्रमुख व्यापारी सदस्य नाराज है और अब नया पाजीटिव हाउस बना सकते हैं। इस पाजीटिव हाउस को आम व मध्यम वर्गीय व्यापारी वर्ग से जोड़ा जायेगा, ताकि हर व्यापारी बिना खर्च के चेंबर चुनाव लड़ सकें।
बताया जाता है कि व्हाईट हाउस से जुड़े आधे व्यापारी कोर ग्रुप के प्रमुखों की मनमानी से त्रस्त है और बगावत का बिगुल फूंकने वाले डा. प्रवीण अग्रवाल को अपना रोल माडल मानने लगे हैं। इसी कारण अब ग्वालियर के बाजारों में व्हाईट हाउस, क्रियेटिव हाउस के साथ पाजीटिव हाउस की विचारधारा जन्म ले रही है। पाजीटिव हाउस का ताना बाना गोपनीय तौर पर तो तैयार हो चुका है, इसकी औपचारिक घोषणा भी शीघ्र की जा सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि इसमे क्रियेटिव हाउस के भी कुछ सदस्य जुड़ सकते हैं। कुल मिलाकर यदि पाजीटिव हाउस का जन्म हुआ तो अब चेंबर में राजनीति व हाउसों की नई कहानी शुरू होगी। वैसे भी व्हाईट हाउस का अब डाउनफाल डा. प्रवीण अग्रवाल, संयुक्त अध्यक्ष सुरेश बंसल व उपाध्यक्ष संदीप नारायण अग्रवाल की जीत के बाद शुरू हो चुका है।
दोनों दीपक व बाबा की जीत के बाद भी व्हाईट हाउस सन्नाटे में
व्हाईट हाउस तीन प्रमुख पदों पर करारी शिकस्त खा चुका है। लेकिन सचिव, सहसचिव व कोषाध्यक्ष जैसे पद उसकी झोली में गये हैं, लेकिन इसके बाद भी व्हाईट हाउस के दिग्गल अरविंद अग्रवाल, डा. वीरेन्द्र गंगवाल व जीएल भोजवानी को खुशी नहीं हैं और न ही इन्होंने कोई प्रतिक्रिया जाहिर की हैं। क्योंकि सही बात यह है कि अरविंद, गंगवाल व भोजवानी केवल अध्यक्ष पद प्रत्याशी पारस जैन का ही काम कर रहे थे। ताकि कैसे भी स्वतंत्र उम्मीदवार व व्हाईट के बगाबती डा. प्रवीण अग्रवाल को पटखनी दी जा सकें। लेकिन चेंबर की राजनीति के चाणक्य बन चुके प्रवीण अग्रवाल ने व्हाईट हाउस के कोर ग्रुप प्रमुख अरविंद अग्रवाल, डा. वीरेन्द्र गंगवाल, जीएल भोजवानी की वह फजीती करा दी जो अभी तक ग्वालियर में कभी क्रियेटिव हाउस भी दिग्गज विष्णु गर्ग की छत्रछाया में कर नहीं सका था। अब दिक्कत प्रशांत गंगवाल के साथ भी उन्हें अगला अध्यक्ष चुनाव लड़ने के लिये फिर से एबीसीडी पढ़नी होगी, क्योंकि अब अध्यक्ष के लिये 6 नये दावेदार भी दमदारी से सामने खड़े होंगे।
गंगवाल हाउस की प्रतिष्ठा पर भी आंच आई
ग्वालियर में गंगवाल हाउस का नाम बेहद सम्मान से लिया जाता था और गंगवाल हाउस के गेट हरेक व्यक्ति के लिये नहीं खुलते। लेकिन इस बार पारस जैन के अध्यक्ष प्रत्याशी के चलते व्हाईट हाउस की बैठक गंगवाल हाउस में कराई गई। जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल भी हुये और पारस जैन की जीत का संकल्प लिया गया। बैठक में डा. वीरेन्द्र गंगवाल, प्रशांत गंगवाल ने अरविंद अग्रवाल के साथ पारस की जीत की अपील भी की। लेकिन यह अपील भी किसी काम की नहीं रही। इससे गंगवाल हाउस की प्रतिष्ठा पर भी शंका उठी है।