देश के ख्यातिनाम बनारस घराने के शास्त्रीय संगीतज्ञ पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र ने की राग मेघ में घुले मल्हार के सुरों की आईटीएम यूनिवर्सिटी में वर्षा
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘राग मेघ‘ के साथ हुआ ‘मेघ मल्हार-2026‘ के द्वितीय दिवस का आगाज
- ‘धीर धरूं कैंसे सावन आवन...संदेशो ना पाये...‘
- ‘कजरा कारे, कारे लागे अति प्यारे, घनघोर घटा छाई, पवन करे सननननन...‘
- ‘जननी मैं न जियूं बिन राम, राम लखन सिया वन को गवन किया, पिता गये सुर धाम...‘
- संगीत जो है सेल्फ एक्सप्रेशन हैः पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र
ग्वालियर । भारतीय ज्ञान परम्परा अध्ययन पीठ आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर एवं आईटीएम यूनिवर्स ग्वालियर की प्रस्तुति ‘मेघ मल्हार-2026‘ के द्वितीय दिवस आगाज ख्यातिनाम बनारस घराने के शास्त्रीय संगीत गायक पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र एवं पंडित स्वरांश मिश्र ने अपने सौम्य और मधुर अंदाज में राग मेघ की विलंबित और द्रुत एकताल में निबद्ध बंदिश में भीगे मेघ मल्हार के साथ किया। संस्थान के सिथौली परिसर में विक्रम साराभाई ब्लाॅक स्थित डाॅ. राममनोहर लोहिया सभागार में कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ. स्मिता सहस्त्रबुद्धे (कुलपति, राजा मान सिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर) शामिल हुईं। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के फाउंडर चांसलर श्री रमाशंकर सिंह जी, प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चौहान, वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय, रजिस्ट्रार डाॅ. ओमवीर सिंह, चारुचि़त्रा, डीएसडब्ल्यू तृप्ति पाठक, आमिर फरुखी, पारितोष मालवीय, आशीष बैश्य (चेयरमैन कॅन्फिडरेशन आफ इंडियन इंड्रस्टीज), संजय विंदल (एक्स प्लांट हेड, जेके टायर) सहित बड़ी संख्या में युवा और ग्वालियर शहर से आए शास्त्रीय संगीत रसिकों ने राग मेघ के सुरों के साथ आनंद उठाया।
‘धीर धरूं कैंसे सावन आवन...संदेशो ना पाये...‘
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के सिथौली परिसर में विक्रम साराभाई ब्लाॅक स्थित डाॅ. राममनोहर लोहिया सभागार में ‘मेघ मल्हार-2026‘ का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन और शास्त्रीय संगीत गायकों का स्वागत कर किया गया। तत्पश्चात ख्यातिनाम बनारस घराने के पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र और पंडित स्वरांश मिश्र ने राग मेघ में विलंबित और द्रुत एकताल की बंदिश प्रस्तुत की। जिसके बोल थे-
‘धीर धरूं कैसे सावन आवन... संदेशो ना पाये,
रैन समूह भयावन लागे,
गगनो गरजे जिया डर पावै...।‘
उनके साथ तबला पर मनीष करबड़े और हारमोनियम पर अक्षत मिश्र ने संगत की।
‘कजरा कारे, कारे लागे अति प्यारे, घनघोर घटा छाई, पवन करे सननननन...‘
इसी क्रम में पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र ने कजरा की प्रस्तुति दी। जिसके बोल थे-
‘कजरा कारे, कारे लागे अति प्यारे
घनघोर घटा छाई, पवन करे सननननन...।
सावन ऋतु आई, मन भय अमि मतवारे...।
बंूदन बरसे मन वल...पिय बिनु कछु न सुहावे...।
घिर-घिर आए आदर, बरसन लागे बूंदरिया, झिंगुआ बोले-झम छननन..।
इसके बाद उन्होंने पंडित बड़े रामदास जी की रचना प्रस्तुत की। जिसके बोल थे-
‘बादर की धमक सुनी जबसे कानन तब से जियरा एक छिन नहीं धरत धीर...।
दादुर, मोर पपीहा शोर मचावे, कोयल की कूक अति ही मन भावे..। रामदास के मोहन प्यार..।‘
इसके बाद उन्होंने दूसरी रचना प्रस्तुत की, जिसके बोल थे-
‘बादर गरज नव घोर रे..., शोर पपीहरा अति करत है,
धधकार सुनि बादल की...।
पानी बरसत अतही प्रवन सो तान बरसत बूंद जैसे परत हैं,
डरपत रिपुअन कटत सब, हनुमंत जब ओम करत हैं..।‘
‘जननी मैं न जियूं बिन राम, राम लखन सिया वन को गवन किया, पिता गये सुर धाम...‘
इसी क्रम में पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र ने राग तेलंग में ठुमरी की प्रस्तुति दी। जिसके बोल थे-
‘दी जो मोहे नई चुनरी मांगा दे बलमवा,
कंगना गढ़ादे, चुड़ियां पहिना दे, तब करियाउं श्रंगार...।‘
इसके बाद उन्होंने तुलसी दास जी की रचना प्रस्तुत की। जिसके बोल थे-
‘जननी मैं न जियूं बिन राम
राम लखन सिया वन को गवन कियो, पिता गये सुर धाम...।
होत भोर हमहूं वन जैवें..., कपटि, कुटिल, कुबुद्धि अभागिन मौन हरयो तेरा प्राण, जननी मैं न जियूं बिन राम...।‘
वहीं अंत में उन्होंने राग भैरवी में भवानी की स्तुति की प्रस्तुति दी।
‘संक्षिप्त में संक्षिप्त की परिभाषा संक्षिप्त है...ः पंडित स्वरांश मिश्र
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘मेघ मल्हार-2026‘ के अवसर पर बनारस घराने के पंडित स्वरांश मिश्र युवाओं प्रेरित करते हुए स्वयं द्वारा लिखी गईं रचनाओं को पड़ा। पहले उन्होंने अघोरी चालीसा सुनाया। जिसके बोल थे- ‘हाथ कपाल गलि मुंड की माल त्रिपुण्ड लगाये...। नात डमरू के ताल...।
इसके बाद उन्होंने कविता संक्षिप्त सुनाई।
‘संक्षिप्त में संक्षिप्त की परिभाषा संक्षिप्त है। संक्षिप्त से संक्षिप्त है परिभाषा संक्षिप्त की। संक्षिप्त तो खुद में ही कितना शूक्ष्म और संक्षिप्त है तो क्या ये परिभाषा संक्षिप्त है।
संक्षिप्त थे हम गर्भ में संक्षिप्त द्वार से हम चले जीवन के उदगम ज्ञान को जीते चले पढ़ते चले अब आया वो समय है शेज पर सोते और सोकर के जागा ज्ञान ये कि जीवन संक्षिप्त है।
वृक्ष का तना खड़ा दिखे है जो हरा भरा विशालकाय तन लिये स्तंभ बनके सोचिये, वो सूर बन गया तो क्या वीर बन गया तो क्या है आज भी सोच में हुआ जैसे मन रिक्त है। प्रभु की कैसी माया क्या सोच कर सजाया उस वृक्ष के तने को जो बोया संक्षिप्त है।
मिलि ज्ञान को प्रशंसा कागा से मन काल भयो। अंधकार अहंकार बदरा मन घिरत गयो, जब तोला है ज्ञान को गुरु ज्ञान के समक्ष तब पाया मौरा ज्ञान जैसे शून्य से संक्षिप्त भयो।
संगीत जो है सेल्फ एक्सप्रेशन हैः पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘मेघ मल्हार-2026‘ के अवसर शास्त्रीय संगीत गायक पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र ने छात्र-छात्राओं और युवाओं से कहा कि संगीत जो है सेल्फ एक्सप्रेशन है। आपके हृदय में जो-जो दृश्य दिखें उनको संगीतमयी रूप से व्यक्त करने का तरीका है। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रीय गायकों का जो साहित्य है, उन लोगों की जो साहित्य की कल्पना है, वह आज की अच्छी-अच्छी कविता में नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि बनारस में कहा गया है कि गबंग, लबंग और उडंग। यानी गढ़ के गाओ, भिड़ के गाओ और उड़के गाओ। क्योंकि संगीत ही दुनिया है।