आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में दो दिवसीय ‘आमोत्सव-3‘ का हुआ शुभारंभ


- दुनिया में सर्वाधिक आम की पैदावार भारत में ही होती हैः  डाॅ. मनीष श्रीवास्तव

- फल और सब्जियां जिंदा होती हैं, इसलिए इन्हें तोड़ने के तुरंत बाद खाना नहीं चाहिएः डाॅ. संजय पाठक

- जीवन का मुख्य लक्ष्य सत्य तक पहुंचना है और इसके लिए आपको ज्ञान व अर्थ का भान होना अत्यंत आवश्यक हैः प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय

- पेड़ पर पकने वाला आम अच्छा नहीं होताः मनीष श्रीवास्तव

- रटौल से लाए आम के पौधों को लगाया गया

- पोस्टर और नारा लेखन के माध्यम से बताया आम का इतिहास, दिखाए गए शाॅर्ट वीडियो

- आज होगा मेला, व्यंजन, बतरस, कविता, संगीत, नाटक, चित्रकारी, झूला और ज्ञान सत्रों का आयोजन

- मेला में अमरस से लेकर ज्ञान स्वाद सहित्य और आनंद का कर सकेंगे रसपान

ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर का परिसर अमराई सा नजर आया। यहां इतिहास से लेकर भविष्य तक के आमों के ज्ञान के रस का स्वाद बताते वक्ता हों या फिर आम की बहुरंगी किस्मों के बारे में जानने की युवा छात्र-छात्राओं की उत्सुकता अलग ही देखने को मिली। मौका था आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में दो दिवसीय ‘आमोत्सव-3‘ के शुभारंभ अवसर का। इस अवसर पर आम पर केंद्रित बहुरंगी-बहुरस उत्सव के तहत प्रथम दिवस ‘मैंगोफेरा इंडिका‘ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्थान के सिथौली कैंपस स्थित डाॅ. राममनोहर लोहिया सभागार में आयोजित इस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ. मनीष श्रीवास्तव (अधिष्ठाता, बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय, आरएलबीएसएयू झांसी) ;स्ठब्।न्ए श्रींदेपद्ध शामिल हुए। वहीं सम्मानित अतिथि के रूप में डाॅ. संजय पाठक (पूर्व अधिष्ठाता, बागवानी महाविद्यालय, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या) और विशिष्ट वक्तागण के रूप में डाॅ. आशीष यादव (वरिष्ठ वैज्ञानिक, केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ), डाॅ. रामकुमार देवांगन (प्रोफेसर महात्मा गांधी बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़) शामिल हुए। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के फाउंडर चांसलर  रमाशंकर सिंह जी, प्रो-चांसरल डाॅ. दौलत सिंह चौहान, वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय, एसओएडी की डीन डाॅ. शमा परवीन, एचओडी डाॅ. जेडी शर्मा, डीन एकेडमिक डाॅ. सोनिया जौहरी,  आईटीएम ग्वालियर की निदेशक डाॅ. मीनाक्षी मजूमदार सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, डीन, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. कल्पना मिश्रा द्वारा किया गया। 

शैक्षणिक-अकादमिक-तकनीकी सत्र

दुनिया में सर्वाधिक आम की पैदावार भारत में ही होती हैः  डाॅ. मनीष श्रीवास्तव
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित दो दिवसीय आमोत्सव-3 में प्रथम दिवस आम पर केंद्रित शैक्षणिक-अकादमिक-तकनीकी सत्र के तहत ‘मैंगोफेरा इंडिका‘ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके बाद आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल आॅफ एग्रीकल्चर की डीन डाॅ. शमा परवीन ने स्वागत भाषण देकर सभी अतिथियों का स्वागत किया। 
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डाॅ. मनीष श्रीवास्तव (अधिष्ठाता, बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय, आरएलबीएसएयू झांसी) (LBCAU, Jhansi) ने कहा कि मैंगो पर मैने अपना जीवन लगा दिया। जब भी मैं इस तरह के आयोजन में आम पर चर्चा करता हं तो मैं आम को अपने हृदय के बेहद करीब पाता हूं। उन्होंने कहा कि दुनिया में सर्वाधिक आम की पैदावार भारत में ही होती हैं। यहां सब्जी और अन्य फसलों के मुकाबले 50 प्रतिशत आम की पैदावार की जाती है। भारत का आम दुनियाभर में मशहूर है। उन्होंने युवाओं आप हाॅर्टिकल्चर के क्षेत्र में आन्त्रप्रेन्योरशिप के तहत अपना भविष्य आजमा सकते हैं। क्योंकि इस क्षेत्र में भविष्य को लेकर अपार संभावनाएं हैं। 
इस दौरान मुख्य अतिथि डाॅ. मनीष श्रीवास्तव ने पीपीटी के माध्यम से आईसीएआर-आईएआरआई दिल्ली के द्वारा 1961 में आमों की विभिन्न किस्मों पर किए गए शोध व किस्मों का उत्पादन बढ़ाने पर किए गए कार्यों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने आमृपाली, पूसा दीपशिखा, पूसा प्रतिभा, पूसा श्रेष्ठा, पूसा लालिमा, पूसा मनोहारी सहित विभिन्न आमों की प्रजाति के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने आमों के जैनेटिक और जीनोम्स के बारे में भी छात्र-छात्राओं को पीपीटी के माध्यम से विस्तार से बताया।
फल और सब्जियां जिंदा होती हैं, इसलिए इन्हें तोड़ने के तुरंत बाद खाना नहीं चाहिएः डाॅ. संजय पाठक
आमोत्सव-3 में अतिथि डाॅ. संजय पाठक (पूर्व अधिष्ठाता, बागवानी महाविद्यालय, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या) ने पीपीटी के माध्यम से आम सहित विभिन्न फलों और सब्जियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फलों व सब्जियों का उत्पादन अन्न से ज्यादा होता है। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल इतनी फल और सब्जी बर्बाद होती है जितनी कि इंग्लैड हर साल खाता है। इस बर्बादी को रोकने के लिए भारत सरकार ने अहम कदम उठाए हैं, जिससे फल व सब्जियां अब लंबे समय तक अच्छी और ताजी बनी रहती हैं। उन्होंने पके हुए आम की पहचान करना बताया। उन्होंने कहा कि फल और सब्जियां जिंदा होती हैं। उन्हें हमेशा तोड़ने के बाद कुछ समय तक ठंडी होने देना चाहिए। जो आम पानी में डूब जाये समझो वह पक चुका है, क्योंकि कच्चा आम पानी में नहीं डूबता। उन्होंने आम को तोड़ने का तरीका बताते हुए कहा कि आम को हमेशा डंठल के साथ तोड़ा जाता है, क्योंकि डंठल के साथ आम नहीं तोड़ा गया तो वह कुछ की घंटों में सड़ने लगता है। इस दौरान उन्होंने आम और विभिन्न फलों व सब्जियों को सड़ने से बचाने के लिए अपनाई जाने वाली टेक्निलक जानकारी भी दी।
जीवन का मुख्य लक्ष्य सत्य तक पहुंचना है और इसके लिए आपको ज्ञान व अर्थ का भान होना अत्यंत आवश्यक हैः प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
आमोत्सव-3 में प्रथम दिवस के कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय ने कहा कि आज हमारा परिसर आम की महक से गुंजायमान है। उन्होंने कहा कि महक की भी अपनी गूंज होती है। उन्होंने कहा कि जीवन का मुख्य लक्ष्य सत्य तक पहुंचना है। और सत्य तक पहुंचने के लिए ज्ञान व अर्थ होना अत्यंत आवश्यक है। अर्थ को समझना है तो भिन्नता से समझिये। जिस तरह एआई शब्दों की भिन्नता को जोड़कर उसका अर्थ हमारे सामने प्रस्तुत करता है। उसी तरह हमें भी अर्थ को समझना होगा। क्योंकि अर्थ को समझे बिना आप ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकते। उन्होंने विभिन्न दार्शिकों का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह ज्ञान को समझने के लिए नीचे उतर कर अर्थ को समझना जरूरी है। ठीक उसी तरह आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित इस आमोत्सव को समझने के लिए आपको देश के विभिन्न आमों के बारे में समझना होगा। हर एक आम की पहचान आपको करनी होगी, तभी आप विभिन्न प्रजाति के आमों को देखकर और उसकी खुशबू से उसे पहचान पाएंगे। 

आमोत्सव-3 में डाॅ. आशीष यादव (वरिष्ठ वैज्ञानिक, केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ) ने बताया कि वर्तमान में जो आम की बैरायटीज हैं उनसे हटकर हमारा संस्थान आम की अंबिका और अरुणिका किस्म को डेबलप कर रहा है। यह आम खाने में स्वादिष्ट होने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी होगा। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि आप शिक्षा अध्ययन के साथ-साथ आमों में पाई जानी वाली कमियों को दूर करने के लिए लैब टेस्टिंग कर सकते हैं।
वहीं डाॅ. रामकुमार देवांगन (प्रोफेसर महात्मा गांधी बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़) ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में हमने देसी बैरायटी 120 को इजाद किया है। इस बैरायटी पर हमारी टीम ग्राउंड लेबल पर काम कर रही है। साथ ही उन्होंने पानी कम होने को लेकर और आमों में होने वाली विभिन्न बीमारियों को लेकर जानकारी दी। सत्र के अंत में एचओडी डाॅ. जेडी शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। 
 
पेड़ पर पकने वाला आम अच्छा नहीं होताः डाॅ. मनीष श्रीवास्तव
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित दो दिवसीय आमोत्सव-3 के तहत आयोजित सत्र के उपरांत प्रश्नोत्तरी सत्र का भी आयोजन किया गया। जहां छात्रा-छात्राएं तान्या, शिवकांत शर्मा, प्रेक्षा, ताबीर सहित अन्य छात्र-छात्राओं आमों से जुड़े अपने सवाल प्रस्तुत किएं। जहां मुख्य अतिथि मनीष श्रीवास्तव ने जवाब देते हुए कहा कि हर किस्म का आम अलग-अलग जगह पैदा होता है। रटौल, दशहरी, लंगड़ा, सिरौली, बांगन सहित अन्य आमों को अच्छी प्रजाति के आमों की श्रेणी में रखा जाता है। उन्होंने कहा कि कभी भी पेड़ पर पका हुआ आम अच्छा नहीं होता। क्योंकि पेड़ पर पकने वाला आम गुठली की ओर से पकता है, इससे आम अंदर ही अंदर सड़ जाता है। इसलिए आम को हमेशा तोड़कर ही पकाना चाहिए।  
रटौल से लाए आम के पौधों को लगाया गया
आमोत्सव-3 के तहत संस्थान के सिथौली स्थित हाॅर्टिकल्चर बागवानी में अतिथियों द्वारा पौधारोपण किया गया। इस पौधारोपण की खास बात यह रही कि यहां दुनियाभर में विख्यात रटौल आम के पौधों को रोपित किया गया। इन पौधों को रटौल आम को विकसित करने वाली तीसरी पीढ़ी जुनैद फरीदी द्वारा स्वयं अपने हाथों से लगाया गया। इस दौरान आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के फाउंडर चांसलर श्री रमाशंकर सिंह जी के अलावा सभी अतिथिगण और स्कूल आॅफ एग्रीकल्चर की डीन व स्टाफ एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

पोस्टर और नारा लेखन के माध्यम से बताया आम का इतिहास, दिखाए गए शाॅर्ट वीडियो
आमोत्सव-3 के अवसर पर इस दौरान पोस्टर एवं नारा लेखन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। जहां छात्र-छात्राओंने पोस्टर और नारा लेखन के माध्यम से आमों के इतिहास को प्रदर्शित किया। वहीं तकनीकी सत्रों के दौरान विभिन्न आमों की किस्मों के इतिहास पर आईटीएम पत्रकारिता विभाग के एचओडी डाॅ. मनीष जैसल और उनकी टीम द्वारा तैयार की गईं वीडियो क्लिप्स भी दिखाई गईं। इस अवसर पर पुरस्कार वितरण का भी आयोजन किया गया। वहीं विभिन्न किस्मों की आम को भी प्रदर्शित किया गया।

आज ग्वालियर में पहली बार प्रदर्शनी में दिखेगा रटौल आम
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियार में आमोत्सव के तहत द्वितीय दिवस यानी 18 जुलाई को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक 200 किस्मों के भारतीय आमों की प्रदर्शनी, आमों की चित्र प्रदर्शनी विक्रम साराभाई ब्लाॅक में की जाएगी। इस प्रदर्शनी में विलक्षण और आम बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे, जिनमें ‘केशरी, जुलाई गोला, गोल गुलाब जामुन, फजली, हुसन परी, डिंगा, लंगडी, रस मुनिया, दशहरी, मालदा, सरहुली (सरौली), नरगिस रसीला, अनार दाना, तमुरिया, गुलाब खास, जाली बंदा, लंगड़ा, मशरूम, शामरी बीस, गुलाब, नील कंठ, लुंगी, फजली, मल्लिका, जलपरी, दिलपसंद, चैसा, दसहरी और रटौल‘ आदि यह विलक्षण किस्म के आम इस बार प्रदर्शनी के दौरान खरीदे जा सकेंगे। इन विभिन्न किस्म के सर्वश्रेष्ठ क्वालिटी के इन आमों में रटौल किस्म पहली बार ही ग्वालियर के नागरिकों को देखने और खरीदने के लिए मिल सकेगी, जिसे जनाब जुनैद फरीदी स्वयं रटौल से अपने बाग (अमराई) से लेकर आ रहे है। 

आज होगा मेला, व्यंजन, बतरस, कविता, संगीत, नाटक, चित्रकारी, झूले और ज्ञान सत्र का आयोजन
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर की प्रस्तुति दो दिवसीय आमोत्सव-3 के द्वितीय दिवस 18 जुलाई को आम पर केंद्रित मेला का उद्घाटन सुबह 11 बजे सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली) द्वारा किया जाएगा। वहीं अनुराग जड़िया, आकाश जाटव, आरिफ खान, आलोक शर्मा, देव्यांशु कदम, मोहम्मद रियाज, शर्मा मुनि लम्बरदार चित्रकारी करेंगे। वहीं नीम वीथिका में आम की थाली-विभिन्न व्यंजन, मिठाइयां व चाट का आयोजन होगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे से 1.30 बजे तक डाॅ. राममनोहार लोहिया सभागार में किस्से आम के (किस्सागोई सत्र) सत्र में जुनैद फरीदी द्वारा भारत-पाकिस्तान का एक और विवाद बिंदु-छोटा, मीठा, रसीला, रटौल आम पर किस्से सुनाए जाएंगे। वहीं दोपहर 2.20 बजे से 2.50 बजे तक फलों का विपण सत्र में राज भाटिया (विधायक, दिल्ली एवं पूर्व अध्यक्ष, आजादपुर फल मंडी दिल्ली) शामिल होंगे। इसी क्रम में दोपहर 2.50 बजे से दोपहर 3.40 बजे तक स्किट और दोपहर 3.45 बजे से शाम 4.30 बजे तक आम पर केंद्रित फिल्मों को दिखाया जाएगा। 
-सभी सत्रों में विद्यार्थी, शोधार्थी शिक्षक एवं जिज्ञासु सुधीजन सादर आमंत्रित हैं।



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