प्रशासन को जनोन्मुखी बनाने में हिंदी की भूमिका अहम: क्षेत्रीय आयुक्त गौतम

ग्वालियर | शासन-प्रशासन को अधिक जनोन्मुखी, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने में राजभाषा हिंदी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंदी केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में एकरूपता, राष्ट्रीय एकता तथा संवैधानिक दायित्वों के प्रभावी निर्वहन की सुदृढ़ आधारशिला है। यह विचार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), क्षेत्रीय कार्यालय, ग्वालियर के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), ग्वालियर कार्यालय-2 के अध्यक्ष सत्यवर्धन गौतम ने गुरुवार को आयोजित नराकास की प्रथम छमाही बैठक में व्यक्त किए।
भारत सरकार की राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से गृह मंत्रालय द्वारा ग्वालियर स्थित केंद्रीय कार्यालयों के लिए नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), ग्वालियर कार्यालय-2 की अध्यक्षता कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), क्षेत्रीय कार्यालय, ग्वालियर को सौंपी गई है। इसी क्रम में राजभाषा विभाग के निर्देशानुसार भविष्य निधि भवन स्थित सभागार में प्रथम छमाही बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के दौरान नराकास सचिवालय द्वारा तैयार 'राजभाषा सहायिका' का विमोचन श्री सत्यवर्धन गौतम एवं अन्य मंचासीन अतिथियों के कर-कमलों द्वारा किया गया।
बैठक में समिति से संबद्ध 24 केंद्रीय कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सदस्य कार्यालयों में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से वरिष्ठ महाप्रबंधक पंकज खुराना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल से उपकमांडेंट मिथिलेश पाण्डेय, सीमा सुरक्षा बल अकादमी से उपकमांडेंट सरदार सिंह, इंटेलिजेंस ब्यूरो से सहायक निदेशक आर.के. सिंह, एसएमएसई से उपनिदेशक राजीव कुमार, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग से अधीक्षण अभियंता रवीन्द्र यादव, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो से सहायक नारकोटिक्स आयुक्त जी.के. सक्सेना, डाक विभाग से उप अधीक्षक विष्णुपाल सिंह यादव, केंद्रीय संचार ब्यूरो से क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी अजय बैस, रेल स्प्रिंग कारखाना से मुख्य कारखाना प्रबंधक शिवाजी कदम, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान से अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुभाष कटारे सहित विभिन्न केंद्रीय कार्यालयों के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं राजभाषा अधिकारी उपस्थित रहे।
क्षेत्रीय आयुक्त सत्यवर्धन गौतम ने राजभाषा अधिनियम, 1963 तथा राजभाषा नियम, 1976 के प्रभावी अनुपालन पर बल देते हुए कहा कि हिंदी के माध्यम से कार्य निष्पदान में न केवल संप्रेषण को सरल बनाता है, बल्कि कार्यो में पारदर्शिता और एकरुपता भी सुनिश्चित करता है। उन्होंने सभी सदस्य कार्यालयों से पत्राचार, टिप्पणियों, आदेशों, अधिसूचनाओं, ई-ऑफिस प्रणाली तथा अन्य डिजिटल माध्यमों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया। बैठक में गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के उपनिदेशक (कार्यान्वयन) नरेन्द्र सिंह मेहरा ने कहा कि राजभाषा नीति का उद्देश्य केवल सांख्यिकीय लक्ष्य प्राप्त करना नहीं, बल्कि हिंदी को कार्य-संस्कृति का स्वाभाविक अंग बनाना है। उन्होंने प्रशिक्षण, नियमित आंतरिक समीक्षा तथा प्रेरक गतिविधियों के माध्यम से हिंदी के प्रयोग को और अधिक प्रोत्साहित करने पर बल दिया। 

प्रगति रिपोर्ट एवं राजभाषा हिंदी के संवर्धन पर हुआ विस्तृत मंथन 
बैठक के दौरान सदस्य कार्यालयों द्वारा राजभाषा हिंदी के प्रयोग, छमाही प्रगति, कार्यान्वयन की स्थिति तथा व्यवहारिक चुनौतियों पर पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विस्तृत चर्चा की गई। विभिन्न कार्यालयों ने कार्यालयीन पत्राचार, नोटशीट, आदेश, अधिसूचनाओं, ई-ऑफिस, ई-मेल, वेबसाइट, सोशल मीडिया तथा अन्य डिजिटल माध्यमों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे नवाचारों एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा किया।
बैठक में हिंदी में मूल रूप से कार्य करने, अनुवाद पर निर्भरता कम करने, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए नियमित राजभाषा प्रशिक्षण, हिंदी कार्यशालाओं के आयोजन, तकनीकी एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यूनिकोड हिंदी के अधिकाधिक उपयोग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित हिंदी उपकरणों के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर भी गंभीर विचार-विमर्श हुआ। सदस्य कार्यालयों ने राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आपसी समन्वय, अनुभवों के आदान-प्रदान तथा श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने पर सहमति व्यक्त की। बैठक में विभिन्न कार्यालयों द्वारा राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार एवं कार्यान्वयन के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों की सराहना करते हुए आवश्यक सुधारात्मक सुझाव भी दिए गए। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी बैठकों में राजभाषा संबंधी गतिविधियों की नियमित समीक्षा कर हिंदी के प्रयोग को और अधिक प्रभावी एवं परिणाममुखी बनाया जाएगा।
इस अवसर पर ईपीएफओ, क्षेत्रीय कार्यालय, ग्वालियर द्वारा संगठन की प्रमुख सेवाओं एवं विभिन्न योजनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। साथ ही, ईपीएफओ की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। बैठक में ईपीएफओं कार्यालय के सहायक भविष्य निधि आयुक्त विवेक कुमार गुप्ता एवं ज्ञानेन्द्र कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन ईपीएफओ के कनिष्ठ अनुवाद अधिकारी एवं समिति के सदस्य-सचिव सोनू कुमार द्वारा किया गया। 

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