आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘साइबर सुरक्षा जागरूकता‘ कार्यक्रम आयोजित


- सभी को साइबर सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक हैः टीआई शक्ति सिंह यादव

- साइबर अपराधी लोगों की छोटी-सी असावधानी का लाभ उठाकर आर्थिक एवं व्यक्तिगत नुकसान पहुंचाते हैंः एसआई मोहिनी वर्मा

- सही जानकारी, समय पर सतर्कता और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम हैः डीएसडब्ल्यू तृप्ति पाठक

ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘साइबर सुरक्षा जागरूकता‘ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां मुख्या वक्ता के रूप में टीआई शक्ति सिंह यादव (झांसी रोड थाना ग्वालियर) व विशिष्ट वक्ता के रूप में साइबर क्राइम सेल प्रभारी और एसआई मोहिनी वर्मा शामिल हुईं। इस अवसर पर स्कूल आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाॅजी के डीन डाॅ. मुकेश पाण्डेय, डाॅ. शशिकांत गुप्ता, डीएसडब्ल्यू तृप्ति पाठक, स्कूल आफ स्पोट्र्स एजुकेशन के एचओडी डाॅ. विपिन तिवारी, प्रवी सिंह सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, डीन, एचओडी, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर,      असिस्टेंट प्रोफेसर, संकाय सदस्य, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

सभी को साइबर सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक हैः टीआई शक्ति सिंह यादव
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘साइबर सुरक्षा जागरूकता‘ कार्यक्रम में मुख्य वक्ता टीआई शक्ति सिंह यादव ने साइबर अपराध की मूल अवधारणा, साइबर सुरक्षा के महत्व तथा वर्तमान डिजिटल युग में ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति सजग रहने की आवश्यकता पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ साइबर अपराधों के मामलों में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं और छात्र-छात्राओं के लिए साइबर सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। इस दौरान उन्होंने उपस्थित संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने, साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने एवं दूसरों को जागरूक करने का संकल्प दिलाया।

साइबर अपराधी लोगों की छोटी-सी असावधानी का लाभ उठाकर आर्थिक एवं व्यक्तिगत नुकसान पहुंचाते हैंः एसआई मोहिनी वर्मा
कार्यक्रम में वक्ता एवं एसआई और साइबर सेल प्रभारी मोहिनी वर्मा ने साइबर एवं डिजिटल अपराधों जैसे डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन स्कैम, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, फिशिंग, क्यूआर कोड फ्रॉड, यूपीआई एवं इंटरनेट बैंकिंग धोखाधड़ी, सोशल मीडिया हैकिंग, फर्जी प्रोफाइल, साइबर बुलिंग तथा ओटीपी और केवाईसी अपडेट के नाम पर होने वाली ठगी जैसे साइबर अपराधों की कार्यप्रणाली और उनसे जुड़े जोखिमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लोगों की छोटी-सी असावधानी का लाभ उठाकर आर्थिक एवं व्यक्तिगत नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा किए गए फोन कॉल, ई-मेल, व्हाट्सएप संदेश, संदिग्ध लिंक अथवा क्यूआर कोड पर बिना सत्यापन के विश्वास नहीं करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से आगाह किया कि किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, एटीएम/डेबिट कार्ड का विवरण, सीवीवी, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। उन्होंने वास्तविक घटनाओं के माध्यम से इन अपराधों के तरीकों, उनसे बचाव के उपयोग और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया।
सही जानकारी, समय पर सतर्कता और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम हैः डीएसडब्ल्यू तृप्ति पाठक
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘साइबर सुरक्षा जागरूकता‘ कार्यक्रम डीएसडब्ल्यू तृप्ति पाठक ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल तकनीकों का उपयोग जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। शिक्षा, बैंकिंग, संचार, स्वास्थ्य, ई-कॉमर्स तथा शासकीय सेवाओं सहित अधिकांश गतिविधियां डिजिटल माध्यमों से संचालित हो रही हैं। ऐसे परिवेश में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन गया है। उन्होंने कहा कि तकनीक जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही सतर्कता की भी अपेक्षा करती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से डिजिटल संसाधनों का विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने, अपनी व्यक्तिगत एवं वित्तीय जानकारी को सुरक्षित रखने, सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सजगता बरतने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सही जानकारी, समय पर सतर्कता और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।

छात्र-छात्राओं ने किए सवाल, विशेषज्ञ वक्ताओं ने जवाब देकर किया जिज्ञाषाओं को शांत
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘साइबर सुरक्षा जागरूकता‘ कार्यक्रम के दौरान संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में छात्र-छात्राओं ने डिजिटल सुरक्षा, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, आॅनलाइन बैंकिंग, यूपीआई लेन-देन, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, साइबर धोखाधड़ी और साइबर अपराध की स्थिति में अपनाई जाने वाली कानूनी एवं तकनीकी प्रक्रियाओं से संबंधित अनेक प्रश्न विशेषज्ञ वक्ताओं से किए। विशेषज्ञ वक्ताओं ने प्रत्येक प्रश्न का सरल, व्यावहारिक एवं उदाहरणों सहित समाधान प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के प्रभावी उपायों से अवगत कराया। विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग करते समय आवश्यक सावधानियाँ बरतने, किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल, ई-मेल अथवा संदेश पर तुरंत प्रतिक्रिया न देने, व्यक्तिगत एवं बैंकिंग संबंधी जानकारी गोपनीय रखने तथा किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में बिना विलंब संबंधित प्राधिकरण को शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। उन्होंने यह भी बताया कि जागरूकता, सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।




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