राष्ट्रीय मंच पर मेघालय का बढ़ा मान : प्रो. पार्थसारथी पाण्डेय को मिला प्रतिष्ठित ‘ग्लोबल प्राइड अचीवर्स अवार्ड–2026
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राजभाषा हिंदी, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए देश के 71 विशिष्ट विभूतियों में हुए सम्मानित*
तिरुवनंतपुरम (केरल)। मेघालय और समूचे पूर्वोत्तर भारत के लिए गर्व और सम्मान का क्षण उस समय उपस्थित हुआ, जब केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिलांग के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. पार्थसारथी पाण्डेय को शिक्षा, राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार, भाषाई समन्वय तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘ग्लोबल प्राइड अचीवर्स अवार्ड–2026’ से गोपाल किरन समाजसेवी संस्था द्वारा अलंकृत किया गया।
यह सम्मान केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित गुलाटी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस एंड टैक्सेशन (GIFT) में आयोजित 22वीं राष्ट्रीय कार्यशाला एवं राष्ट्रीय सम्मान समारोह के दौरान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन गोपाल किरण समाजसेवी संस्था (GKSSS) द्वारा एसआरएम विश्वविद्यालय, दिल्ली-एनसीआर, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट (IIMAD), GIFT तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
राष्ट्रीय कार्यशाला का विषय “प्रवासी भारतीयों के सीमा-पार पारिवारिक विवाद : चुनौतियाँ, समाधान एवं विधिक सुधार” रहा। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए न्यायविदों, उच्च शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, समाजशास्त्रियों एवं नीति-निर्माताओं ने प्रवासी भारतीय परिवारों से जुड़े कानूनी, सामाजिक और मानवीय प्रश्नों पर गंभीर विमर्श करते हुए प्रभावी समाधान और नीतिगत सुधारों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
राष्ट्रीय सम्मान समारोह में शिक्षा, साहित्य, शोध, संस्कृति, समाजसेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 71 विशिष्ट विभूतियों को ‘ग्लोबल प्राइड अचीवर्स अवार्ड–2026’ से सम्मानित किया गया। इनमें प्रो. पार्थसारथी पाण्डेय मेघालय राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र सम्मानित व्यक्तित्व रहे। उन्हें विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में हिंदी भाषा के संवर्धन, गुणवत्तापूर्ण भाषा शिक्षण, शैक्षणिक नेतृत्व तथा राष्ट्रीय समरसता को सशक्त बनाने में उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्रीय शक्ति में बदलने का कार्य प्रो. पाण्डेय जैसे शिक्षाविदों के समर्पित प्रयासों से ही संभव हो पाया है। उनका कार्य केवल एक अकादमिक उपलब्धि नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत और मुख्यधारा के बीच सांस्कृतिक एवं भाषाई सेतु का सशक्त उदाहरण है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजकों ने घोषणा की कि आगामी राष्ट्रीय कार्यशाला एवं ग्लोबल प्राइड अचीवर्स अवार्ड समारोह का आयोजन हैदराबाद (तेलंगाना) तथा शिलांग (मेघालय) में किया जाएगा। यह घोषणा मेघालय के लिए विशेष महत्व रखती है तथा पूर्वोत्तर भारत में राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श को नई दिशा प्रदान करेगी।
प्रो. पार्थसारथी पाण्डेय को प्राप्त यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि मेघालय, पूर्वोत्तर भारत और हिंदी जगत के लिए गौरव, प्रेरणा और राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक है। यह उपलब्धि उन सभी शिक्षाविदों और भाषा साधकों के लिए भी प्रेरणास्रोत है, जो शिक्षा और भारतीय भाषाओं के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के कार्य में निरंतर समर्पित हैं।