अयोध्या राम मंदिर गबन मामले में पदाधिकारियों के विरुद्ध न्यायिक जांच और एफआईआर की मांग--कौशल शर्मा
ग्वालियर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मध्य प्रदेश राज्य कार्यकारिणी सदस्य कॉमरेड कौशल शर्मा एडवोकेट ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि एसआईटी (विशेष जांच दल) की रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या राम मंदिर गबन मामले में दर्ज की गई एफ आई आर केवल हिमखंड का ऊपरी हिस्सा है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर्याप्त नहीं हैं। उनकी भूमिका, जिम्मेदारी और संभावित मिलीभगत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। कुछ कनिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध मामले दर्ज करना, जबकि आरएसएस, भाजपा और वीएचपी के वरिष्ठ नेतृत्व को संरक्षण देना, जवाबदेही के नाम पर केवल लीपापोती (कवर-अप) है।
अयोध्या के जिलाधिकारी (डीएम) को रिपोर्ट करने वाली एसआईटी, जो स्वयं ट्रस्ट के पदेन सदस्य हैं, जनता का विश्वास नहीं जगा सकती। ऐसी व्यवस्था स्वभावतः पक्षपातपूर्ण है और पूरे सत्य को सामने लाने में सक्षम नहीं है। ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, क्योंकि उनकी जवाबदेही केवल इस्तीफे देकर समाप्त नहीं हो सकती।
प्रतिदिन ऐसी नई रिपोर्टें सामने आ रही हैं कि श्रद्धालु बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और नकद दान कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई रसीद नहीं दी जा रही है। यह घोटाला अब तक सामने आई जानकारी से कहीं अधिक बड़ा प्रतीत होता है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का शोषण नहीं किया जा सकता और उनकी भेंट को दंडमुक्तिकि पूरे मामले की जांच एक स्वतंत्र न्यायिक निकाय को सौंपी जानी चाहिए।