फिर खनकेंगी रसोई में करछियाँ, बुंदेली शेफ सीज़न 4 का काउंटडाउन शुरू


25 जून से शुरू होगी स्वाद और हुनर की नई यात्रा, अगस्त के अंत में मिलेगा सीज़न 4 का विजेता
तीन ऑडिशन राउंड, क्वार्टर फाइनल, सेमी फाइनल और ग्रैंड फिनाले के रोमांचक पड़ावों से गुज़रेंगी प्रतिभागी
छतरपुर, : इन दिनों बुंदेलखंड की कई रसोइयों में मसालों की खुशबू के साथ एक अलग तरह का उत्साह भी पक रहा है। कहीं नई रेसिपी पर प्रयोग हो रहे हैं, कहीं दादी-नानी के पुराने स्वाद फिर से याद किए जा रहे हैं, तो कहीं महिलाएँ अपनी सबसे खास डिश को और बेहतर बनाने में जुटी हैं। वजह है 'बुंदेली शेफ सीज़न 4', जिसका इंतजार, जो कि अब धीरे-धीरे एक उत्सव का रूप लेने लगा है। पिछले तीन सीज़न्स में अनगिनत सपनों को पहचान देने वाला यह मंच अब अपने अगले अध्याय की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ ही सम्पूर्ण बुंदेलखंड में स्वाद, हुनर और आत्मविश्वास की नई हलचल महसूस की जा सकती है। बुंदेलखंड 24x7 द्वारा आयोजित इस लोकप्रिय ऑनलाइन कुकिंग प्रतियोगिता का पहला ऑडिशन 25 जून को आयोजित किया जाएगा। इसके बाद दूसरा ऑडिशन 10 जुलाई और तीसरा ऑडिशन 20 जुलाई को होगा। 
उपरोक्त ऑडिशन राउंड्स में बुंदेलखंड की महिला प्रतिभाएँ अपनी सबसे खास रेसिपीज़ और अनूठे स्वाद का जादू बिखेरेंगी। इन पड़ावों से गुजरकर 15 प्रतिभागी जुलाई के अंतिम सप्ताह में होने वाले क्वार्टर फाइनल तक पहुँचेंगी, जहाँ मुकाबला और भी दिलचस्प हो जाएगा। इसके बाद अगस्त के पहले सप्ताह में सेमी फाइनल का रोमांच देखने को मिलेगा, जिसमें 8 चयनित प्रतिभागियों के साथ 3 वाइल्ड कार्ड एंट्री भी अपनी किस्मत आजमाएँगी। और फिर अगस्त के अंत में होने वाले भव्य ग्रैंड फिनाले में 5 सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों के बीच बुंदेली शेफ सीज़न 4 का ताज हासिल करने जंग होगी।
बुंदेलखंड 24x7 के फाउंडर डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा, "जब कोई महिला अपनी पसंदीदा डिश बनाती है, तो उसमें सिर्फ मसालें नहीं, बल्कि अपने अनुभव, अपने संस्कार और अपने ममत्व का मिश्रण भी घोलती है। 'बुंदेली शेफ' उन्हीं भावनाओं को सम्मान देने का मंच है। पिछले तीन सीज़न्स में हमने देखा है कि इस प्रतियोगिता ने सिर्फ विजेता नहीं दिए, बल्कि आत्मविश्वास से भरी ऐसी कहानियाँ दी हैं, जिन्होंने पूरे बुंदेलखंड को प्रेरित किया है। सीज़न 4 में भी हम ऐसे ही नए चेहरों की तलाश में हैं, जिनके हाथों का स्वाद और जिनके सपनों की उड़ान दूर तक जाए।"
पिछले तीन सीज़न्स ने यह साबित किया है कि कभी-कभी पहचान की शुरुआत रसोई से भी होती है। जिन हाथों ने वर्षों तक परिवार के लिए प्रेम से भोजन बनाया, उन्हीं हाथों ने इस मंच पर आकर अपनी अलग पहचान भी बनाई। शमिता सिंह, ज़हीदा परवीन और शाजिदा अमीर इसकी सबसे खूबसूरत मिसाल हैं। कभी प्रतियोगी के रूप में मंच पर खड़ी ये महिलाएँ आज उन सैकड़ों प्रतिभागियों की प्रेरणा बन चुकी हैं, जो अपने हुनर को घर की चौखट से निकालकर एक बड़े मंच तक ले जाना चाहती हैं।
असली बात यह है कि 'बुंदेली शेफ' अब सिर्फ एक कुकिंग प्रतियोगिता नहीं रह गया है। यह उस विश्वास का नाम बन चुका है, जो कहता है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या बड़े मंच की मोहताज नहीं होती। कभी किसी छोटे-से गाँव की रसोई से उठने वाली खुशबू भी सम्पूर्ण बुंदेलखंड की पहचान बन सकती है। शायद यही वजह है कि सीज़न 4 की शुरुआत के साथ ही पूरे क्षेत्र में उत्सुकता और इंतजार का स्वाद एक बार फिर घुलने लगा है।

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