कृषि में संतुलित उर्वरक प्रबंधन पर कृषक संगोष्ठी हुई

ग्वालियर। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा शुक्रवार को खरीफ फसलों की बोनी पूर्व संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर कृषक संगोष्ठी का आयोजन अंगीकृत ग्राम सिरसौद में किया गया। संगोष्ठी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद क्षेत्रीय आलू अनुसंधान केन्द्र के साथ संयुक्त रूप से आयोजित की गई। 
संगोष्ठी में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह ने बताया कि खरीफ फसल तिल, ज्वार, धान एवं सब्जियों में पोषक तत्व प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि लगातार डी.ए.पी., यूरिया के अंधाधुंध प्रयोग से भूमि की भौतिक एवं जैविक दशा खराब हो रही है। फसलों को 16 तत्वों की आवश्यकता होती है जो कि गोबर की खाद, केंचुआ खाद, हरी खाद से मिलाते हैं। इसी क्रम में केन्द्र के वैज्ञानिक डाॅ. राजीव सिंह चौहान ने कृषकों को एकल फसल प्रणाली की जगह समन्वित कृषि प्रणाली अपनानी चाहिए, जिसमें शस्य फसलों के साथ-साथ, मौसमी सब्जियां, फल के बगीचे, केंचुआ खाद, मछली, मुर्गी एवं बकरी पालन आदि को बढ़ावा देकर कृषि में होने वाले जोखिम से बचा सकता है। केन्द्र के वैज्ञानिक डाॅ. एस.सी. श्रीवास्तव ने अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रयोग से जहरीले हो रहे कृषि उत्पाद को सही करने हेतु प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर दिया। क्षेत्रीय आलू अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक डाॅ. सुभाष कटारे ने संतुलित उर्वरकों का सब्जियों एवं आलू में प्रयोग के साथ-साथ आलू के रोग एवं कीट प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की। डाॅ. मुरलीधर ने आलू की उन्नतशील प्रजातियों एवं तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में 100 से अधिक कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया।  

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