बिजली चेकिंग के दौरान ईमानदार उपभोक्ताओं के बनाए गए पंचनामा की हार्ड कॉपी उपभोक्ता को दी जाए : MPCCI

पंचनामा से संबंधित समस्याओं पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को लिखा पत्र
ग्वालियर।  विद्युत वितरण कं. द्वारा अब पंचनामा की जानकारी ‘मोबाइल एप’ में भरकर, उसकी हार्ड कॉपी उपभोक्ताओं को नहीं दी जा रही है। पंचनामा की हार्ड कॉपी उपभोक्ता को दिए जाने की माँग करते हुए आज “म. प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री” द्वारा प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को पत्र प्रेषित किया गया ।
MPCCI, अध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल, संयुक्त अध्यक्ष हेमन्त गुप्ता, उपाध्यक्ष डॉ. राकेश अग्रवाल, मानसेवी सचिव दीपक अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव पवन कुमार अग्रवाल एवं कोषाध्यक्ष संदीप नारायण अग्रवाल ने अवगत कराया है कि विद्युत वितरण कं. के अधिकारियों द्वारा ‘मोबाइल एप’ पर जानकारी भरकर यह मान लिया जाता है कि ‘पंचनामा’ की जानकारी उपभोक्ता को एसएमएस के माध्यम से पहुँच गई है, जबकि प्रदेश भर के उपभोक्ताओं में से लाखों उपभोक्ताओं के मोबाइल नं. डले ही नहीं है या गलत नं. डले है अथवा उपभोक्ता इसको देख ही नहीं पाता है । ऐसी स्थिति में उपभोक्ता निर्धारित समय पर इसकी आपत्ती नहीं कर पाता है और जब यह राशि कई दिनों बाद उसके नियमित विद्युत बिल में भेजी जाती है, तब उसको ज्ञात होता है कि उसके यहाँ चेकिंग हुई थी । उक्त अवस्था में जब वह आपत्ति लगाता है, तो उसे सुना ही नहीं जाता है और पूरी राशि जमा करने के लिए उसे बाध्य किया जाता है ।
पदाधिकारियों ने बताया कि चैकिंग पंचनामा भरने और भरने के बाद उसके प्रभाव से निम्न विसंगति उत्पन्न हो रही हैं : (अ) पंचनामे में भरी गई जानकारी वास्तविकता में यदि गलत भर गई है । इस आधार पर भी संशोधित करने का प्रावधान नहीं किया गया है । उदाहरण के लिए यदि किसी उपभोक्ता/अनाधिकृत उपयोग करने वाले का नाम गलत लिख दिया, तब भी संशोधित नहीं हो सकता है । (ब) यदि किसी उपभोक्ता के यहाँ पाए गए उपकरणों का भार गलत अंकित कर दिया गया, तब भी उस भार को संशोधित नहीं किया जाता है और संबंधित जाँचकर्ता अधिकारी द्वारा यह विवशता जताई जाती है कि सॉफ्टवेयर में संशोधित भार को संशोधित करने का अधिकार उसको नहीं है, जबकि विद्युत अधिनियम के मुताबिक ऐसी किसी चेकिंग पर प्रारूप 4 भरा जाता है , जिसकी लिखित प्रति उपभोक्ता को दी जानी चाहिए, उसके बाद जाँचकर्ता अधिकारी प्रारूप 5 जारी करके अंतिम निर्धारण आदेश जारी करता है, जिसे प्रारूप 5 कहते हैं, उसकी लिखित प्रति भी उपभोक्ता को दी जानी चाहिए, जिससे उस पर कोई आपत्ती हो, तो वह तय समय में प्रस्तुत कर सके । तद्उपरांत जाँचकर्ता अधिकारी को प्रारूप 6 के तहत अंतिम निर्धारित आदेश जारी करना चाहिए । बावजूद इसके इसका कतई पालन नहीं किया जा रहा है ।
पदाधिकारियों ने बताया कि ऊर्जा मंत्री को प्रेषित पत्र में तदर्थ, उदाहरणार्थ 2 प्रकरणों का विस्तार से उल्लेख भी किया गया है । साथ ही, पत्र में इनवर्टर का लोड भी संशोधित भार में जोड़े जाने की माँग करते हुए उल्लेख किया गया है कि  वितरण कं. द्वारा लगभग प्रति सप्ताह मेन्टीनेंस के लिए घोषित कटोती और प्रतिदिन अघोषित विद्युत कटोती होती है, उसके लिए उपभोक्ता इनवर्टर लगाता है । उसका भार भी विद्युत अधिनियम की धारा-126 के अन्तर्गत गैर घरेलू उपभोक्ताओं पर भार वृद्धि की बिलिंग कर दी जाती है, जबकि वह इनवर्टर वितरण कं. के द्वारा प्रदाय की जाने वाली सप्लाई में असफल होने में की जाती है और वह इनवर्टर की बेट्री जो चार्ज होने में जो विद्युत का प्रयोग करती है, वह वितरण कं. के मीटर में खपत के रूप में दर्ज होती है । अतः वितरण कं. को कोई राजस्व की क्षति भी नहीं होती है । इसके अलावा इनवर्टर नियमित रूप से उपभोग में आने वाला उपकरण भी नहीं है, बल्कि यह विद्युत प्रदाय का पूरक है, जो वितरण कं. को राजस्व देकर ही सेवा देने लायक बनता है । इसलिए इसका भार कनेक्टेड लोड में नहीं जोड़ा जाना चाहिए ।
पत्र में कहा गया है कि ऐसी कार्यवाहियाँ ईमानदार उपभोक्ता के शोषण की श्रेणी में आती हैं । इससे असंतोष पनपता है । आपके स्थानीय होने से यह असंतोष और ज्यादा पनप रहा है कि विभाग के मुखिया होने के बाद भी बिजली विभाग दमनकारी कार्य कर रहा है, ऐसे असंतोष जन आंदोलन को जन्म देते हैं, जो विभाग की छवि को धूमिल करते है । इसके साथ ही, वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ऐसी सारी बिलिंग पर नियंत्रण भोपाल में बैठे अधिकारियों को सौंपकर, उन्हें ज्यादा विश्‍वसनीय माना गया है, जबकि ग्वालियर में मुख्य महाप्रबंधक जैसे वरिष्ठ अधिकारी पदस्थ हैं और स्थानीय अधिकारी के समक्ष उपभोक्ता जब अपनी परेशानी रखता है, तब अधिकारियों को व्यवहारिक पक्ष नजर आता है । पत्र में माँग की गई है कि :-
*  पंचनामे की मूल प्रति प्रारूप चार एवं अंतिम निर्धारण आदेश प्रारूप पाँच की प्रति उपभोक्ता को दिया जाना आवश्‍यक किया जाए ।
*  पंचनाम में कोई भी जानकारी यदि त्रृटिपूर्ण अंकित हुई है, तो सत्यता के आधार पर उसमें सुधार किया जाए ।
*  पंचनामे के संदर्भ में किसी भी सुधार के लिए भले ही महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी को जिम्मेदार बनाया जाए, लेकिन स्थानीय स्तर पर नियंत्रण रखा जावे ।
*  इन्वर्टर का भार संशोधित भार में नहीं जोड़ा जाना चाहिए ।

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