जैसा संग करोगे, वैसा ही ढंग बन जाएगा : सागर आनंद महाराज

- संत शिरोमणि रविदास महाराज संगीतमयी कथा का दूसरा दिन
ग्वालियर। पुरुषार्थ सेवा फाउंडेशन के तत्वावधान में ठाठीपुर स्थित संत कबीर आश्रम में सप्त दिवसीय संत शिरोमणि रविदास जी महाराज संगीतमयी कथा के दूसरे दिवस समाज को एक करने के लिए प्रेरक संदेश दिए गए। व्यास पीठ की आरती डॉ. राकेश रायजादा, डॉ. अंजलि रायजादा, सेवानिवृत मुख्य अभियंता आर. एल. एस. मौर्य, अनिल दोहरे, सुमन लता दोहरे ने की। 
कथावाचक उत्तराखंड के प्रसिद्ध संत सागर आनंद महाराज ने ओजस्वी वाणी में कहा कि संतों ने तीन बातें बताई हैं, जैसा संग करोगे, वैसा ही आपका ढंग बन जाएगा। उन्होंने संगत का एक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बारिश की एक बून्द जब सीप में गिरती है, तो मोती बन जाती है, यही बून्द जब केले के पत्ते पर गिरती है तो कपूर बनती है और जब पानी में गिरती है तब उसका अस्तित्व मिट जाता है। महाराज जी ने कहा कि आपको यह तय करना है कि हमें कैसी संगत करना है। प्रवचन के दौरान सागर आनंद महाराज ने जीवन को सर्वोत्तम बनाने के लिए अनेक उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि जब हम अपने इष्ट के समक्ष खड़े होते हैं, तब हमारे मन के विकार समाप्त हो जाते हैं। अपने इष्ट और संतों के समक्ष अपनी समस्या रख दीजिए, समाधान मिलेगा ही, यह तय है। उन्होंने कहा कि आज समस्याएं बहुत हैं, लेकिन उनका समाधान केवल इष्ट या संत के पास हैं।  
महाराज जी ने कहा कि जब संत रविदास जी का प्राकट्य नहीं हुआ था, तब उनके अवतरित होने का अहसास होने लगा था। उस समय के संतों ने यह जान लिया था कि धरती पर कोई महान विभूति जन्म लेने वाली है। संतों ने तय किया कि उस जगह की खोज की जाए, जब वे काशी के पास आए तो आध्यात्म की किरण का उजाला दिखने लगा। सभी संत यहीं आश्रय बनाने लगे। उसके बाद इसी भूमि पर संत शिरोमणि रविदास जी महाराज प्रकट हुए। उन्होंने समाज के सभी वर्गों के बीच सामंजस्य का भाव स्थापित किया। महाराज जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में चार आश्रम बताए गए हैं, ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। इन सबमें गृहस्थ आश्रम को सबसे बड़ा बताया है, क्योंकि बाकी तीनों आश्रम की व्यवस्था गृहस्थ ही करता है।

*यह रहे उपस्थित*
पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल, मनीष राजोरिया, रामप्रकाश मंडेलिया, अमृतलाल बाबूजी, शोभरन सिंह, श्रीमती वर्षा सुमन, श्रीमती रीना सोलंकी, पुरुषोत्तम बनेरिया, अर्जुन जाटव, पोपसिंह जाटव, सुरेश सोलंकी, श्रीमति सोमवती जाटव, श्रीमति पिंकी सेंगर, श्रीमति सीमा माहौर, आत्मादास केन आदि उपस्थित रहे।

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