मप्र में केवल ग्वालियर में प्रीमियम बेस्ड FAR लगाना ग्वालियर के आर्थिक विकास में सबसे बड़ा रोड़ा :- प्रवीण
अग्रवाल
मप्र चैंबर सहित क्रेडाई ओर अन्य संस्थाओं ने संभागीय आयुक्त के समक्ष उपस्थित होकर करी आपत्ति
ग्वालियर 30 अप्रैल मप्र नगर तथा ग्राम निवेश के मुताबिक प्रीमियम बेस्ड FAR पर मास्टर प्लान 2035 के प्रस्तावित प्रारूप में प्रीमियम फ्लोर एरिया रेशों की खरीदी पर .05% किया गया था
लेकिन उसके अंतिम प्रकाशन में यह .5% हो गया अर्थात 5% के स्थान पर कलेक्टर गाइडलाइन का 50% राशि देने का प्रावधान हो गया जो पूरे मप्र में कही भी नहीं है
इसको सही करने के लिए जब लगातार दबाव बना तो 19 जुलाई 2025 को को दरों में संशोधन के लिए आम सूचना प्रकाशित की गई जिसमें प्रीमियम बेस्ड FAR के लिए पुनः .05% यानी 5% का प्रावधान किया गया उस पर कोई आपत्ति नहीं आने के बाद भी उसका कोई अंतिम प्रकाशन नहीं किया गया बल्कि एक नयी आम सूचना प्रकाशित की गई जिसमें 25% का प्रावधान कर आपत्ति मांगी गई थी जिसपर ग्वालियर से लगभग 160 आपत्ति दर्ज करवाई गई जिस पर आज व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देते हुए संभागीय आयुक्त कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया था जिसमें चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से डॉ प्रवीण अग्रवाल ने इस पर आपत्ति प्रस्तुत करते हुए सवाल खड़ा किया कि जब 19 जुलाई 2025 को पांच प्रतिशत की दर से आम सूचना प्रकाशित की गई थी तब उसका अंतिम प्रकाशन करवाए बिना नई दर का प्रस्ताव लाया ही नहीं जा सकता है इसलिए सबसे पहले पांच प्रतिशत की दर वाली सूचना का प्रकाशन करवाया जाए डॉ प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि एक राज्य ओर अलग अलग प्रावधान यह ग्वालियर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा है जो अन्याय की श्रेणी में आता है
डॉ प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि यह शासन की मंशा भी नहीं है बल्कि भोपाल में बैठे आला अधिकारी की जिद का परिणाम है ओर ऐसे अन्याय आंदोलनों को जन्म देते है जो न तो शासन के लिए अच्छे होते है और न ही प्रशासन के लिए अच्छे होते है
इस विषय पर क्रेडाई के अध्यक्ष सुदर्शन झवर उनके अभिभाषक प्रशांत शर्मा ने भी इसे अन्यायपूर्ण ओर विधि अनुरूप नहीं होने की बात कही उनका कहना था कि बेसिक FAR की सही गणना करे बिना प्रीमियम बेस्ड FAR की गणना ही नहीं की जा सकती है
इस अवसर पर चैंबर के उपाध्यक्ष राकेश अग्रवाल मानसेवी सचिव दीपक अग्रवाल शैलेश जैन अतुल पाठक दीपक पमनानी आदि लोगों ने भी अपनी आपत्ति प्रस्तुत की