आम जन की जागरूकता से ही बनेगा महानगर स्वच्छ
रविकांत दुबे
ग्वालियर । शहर को स्वच्छ बनाने व गंदगी नहीं फैले इसके लिए डोर टू डोर कचरा संग्रहण हेतु गाड़ियों का बेडा नगर निगम मे शामिल किया गया है, जिससे शहर की सड़क, गली मोहल्लो मे कचरा दिखाई नहीँ दें। इसके बावजूद डोर टू डोर संग्रह के लिए महानगर के सभी इलाकों मे कचरा गाड़ियां नहीं पहुंच पा रहीं है। वहीं मोहल्ले, वार्ड के लोग घरों से निकल कर कचरे को किसी भी कोने मे फेंक रहे है। इससे जगह जगह गंदगी के अंबार देखे जा सकते है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कचरा वाहन चालक किसी भी गली मोहल्ले मे रोज नहीँ आते है। बल्कि किसी एक जगह पर आ कर कुछ देर के लिए खड़े हो जाते है। वही से चिर परिचित गीत बजा कर लोगो को जता देते है कि घर मे रखे कचरे को आ कर कचरा गाडी मे डाल जाये। ऐसे मे कई लोग कचरे को ला कर कचरा वाहन में डाल जाते है। वही कुछ लोग कचरा ले कर आते जरूर है, लेकिन कचरा गाड़ी के कुछ समय रूक कर आगे बढने के बाद लोग घर से लाये कचरे की बाल्टी को घर वापस ना ले जाकर कही भी या किसी भी कोने मे फेंक जाते है। कुछ कचरा गाड़ी के चालक केवल संगीत बजाते हुए धीमी रफ्तार के साथ आगे बढ़ते हुए निकल जाते है चाहे कोई कचरा डाले या नहीँ डाले। आम जन द्वारा बार बार क्षेत्रीय अधिकारियो से शिकायत करने पर भी कोई सुधार नहीँ होता और गली मोहल्लों में गंदबी का अंबार लगा देखा जा सकता है। कई बार कचरा वाहन चालक का भी गाड़ी रोकने के लिए मोहल्ले वासियो से कहा सुनी भी हुई, गाड़ी चालक का कहना है कि कम समय मे हमें प्रत्येक जगह पर पहुंचना होता है। आप लोग अधिकारियो से कहो कि यहां एक कचरा गाड़ी के बजाये और और वाहनों की भी व्यवस्था करा दी जाये इससे समस्या का हल हो जायेगा। कचरा गाड़ी का दिन मे किसी भी समय पर मोहल्ले मे आना भी लोगो के लिए मुसीबत बना हुआ है। बेसमय कचरा गाड़ी आने पर कई लोग अपनी जीविकोपार्जन के लिए घर से बाहर निकल जाते है। ऐसे मे यही लोग घर के कचरे को गली के कोनो मे कचरा फेक कर निकल जाते है। इसी के साथ मोहल्लों कालोनियों में आने वाली घरों मंे काम करने वाली भी कचरे की थैली को गंदगी के ढेर पर फेंक कर निकल जाती है। इसे उठाने वाला कोई सफाई कर्मी कोई नहीँ आता, पड़े कचरा को आवारा पशु गाय, कुत्ता, सूअर द्वारा बिखेर दिया जाता है। बहुत साल पहले नगर निगम मे हाथ गाड़ी से कचरा उठाने वाले, झाड़ू लगाने वाले कर्मचारी नियमित आते थे, जिससे गली,मोहल्ले साफ सुथरे बने रहते थे। अब कर्मचारी तों है लेकिन वे विशेष त्यौहार,अधिकारियो के निरीक्षण से पूर्व ही सक्रिय हों जाते है,इसके बाद इनको ढूंढना पाना मुश्किल है।
शहर की आबादी का बढ़ना और नगर निगम की सीमा का विस्तार हों जाना भी रोजाना कचरा नहीँ उठना भी महागनर में गंदगी का एक कारण है। इसके लिए निगम मे कर्मचारीयों और वाहन की संख्याओं मे वृद्धि की जाना आवश्यक हों गया है।तब कही जाकर शहर को स्वच्छ बनाने को मुहीम सफल रहेगी।