*राग वसंत से हुआ वसंत पंचमी का स्वागत, झप ताल में गूंजा ‘भवानी दयानी’*


- संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में में शुक्रवार को वसंत पंचमी पर हुआ कार्यक्रम।
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राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में शुक्रवार को वसंत पंचमी उत्सव संगीत की सुरमयी छटा के साथ मनाया गया। कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्र–छात्राओं एवं गुरुजनों ने मां सरस्वती को समर्पित वंदनाएं, भजन एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम की खासियत यह रही कि एक ही मंच पर गुरु–शिष्य परंपरा की सुंदर जुगलबंदी देखने को मिली। वसंत पंचमी को समर्पित राग वसंत में हुई प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत अखिलेश अहिरवार ने राग अहीर भैरव में सुमधुर गायन से की। उन्होंने ‘मनवा तू जागत रहियो…’ तथा द्रुत एकताल में ‘बेगी बेगी आओ सुंदर…’ बंदिश प्रस्तुत की।
*सुरबहार पर ध्रुपद की जीवंत प्रस्तुति*
डॉ. श्याम रस्तोगी ने सुरबहार वाद्य पर डागर परंपरा की ध्रुपद शैली को जीवंत किया। उन्होंने राग सरस्वती में आलाप, जोड़ व झाला के बाद सूल ताल में बंदिश प्रस्तुत की। पखावज पर जयवंत गायकवाड़ ने संगति की। इसी क्रम में सुजल जैन ने राग वसंत बहार में मनोहारी प्रस्तुति दी।
*ताल वसंत में तबले की गूंज*
संजय राठौर ने ताल वसंत में पेशकार, कायदे, टुकड़े, रेला व गत प्रस्तुत की। इसके बाद द्रुत तीन ताल में आकर्षक गतें और टुकड़े पेश किए गए।
*‘मोरी आई ऋतु वसंत’ ने बांधा समां*
डॉ. पारुल दीक्षित ने राग वैरागी भैरव में सरस्वती वंदना ‘मां शारदे जगत जननी…’ प्रस्तुत की। इसके पश्चात राग वसंत, एकताल में ‘मोरी आई ऋतु वसंत…’ बंदिश का सुमधुर गायन किया और अंत में तराना पेश किया।
*नौ मात्रा में तबले का नवाचार और भावपूर्ण गायकी*
डॉ. मनीष करवड़े ने नौ मात्रा में पारंपरिक ठेके से हटकर स्वयं रचित ठेका प्रस्तुत किया। उनके साथ लहरे पर अब्दुल हामिद तथा तबले पर बसंत हरमरकर ने संगति की।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. संजय सिंह ने झप ताल में ‘भवानी दयानी…’ बंदिश को भावपूर्ण गायकी के साथ प्रस्तुत किया।
*ये रहे मौजूद*
इस अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ संगीतज्ञ श्रीराम उमडेकर रहे। कार्यक्रम में विधा परिषद सदस्य अशोक आनंद, कार्य परिषद सदस्य चंद्र प्रताप सिकरवार, आरएसएस के निरुपम निवासकर विशेष रूप से उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव अरुण सिंह चौहान, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, डॉ विकास विपट, पीआरओ कुलदीप पाठक सहित समस्त विश्वविद्यालय परिवार मौजूद रहा।

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