बंगाली सोशल एंड कल्चरल एसोसिएशन की 34वीं दुर्गा पूजा का शुभारंभ
ग्वालियर। बंगाली सोशल एंड कल्चरल एसोसिएशन (BSCA) द्वारा मानस भवन में आज विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माँ दुर्गा की षष्ठी पूजा संपन्न की गई। पूजा-अर्चना के उपरांत सायंकाल माँ दुर्गा का आह्वान करते हुए भव्य आगमनी नृत्य-नाटिका का मंचन किया गया। इसके साथ ही बंगाली समाज की दुर्गा पूजा का विधिवत शुभारंभ हो गया। बंगाली समाज द्वारा कोलकाता की पारंपरिक पूजा पद्धति के अनुरूप मानस भवन में लगातार 34 वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। बंगाली परंपरा के अनुसार पूजा षष्ठी से प्रारंभ होकर दशमी तक चलती है।
इस वर्ष सप्तमी तिथि 17 एवं 18 अक्टूबर को दो दिन रहेगी, जबकि 19 अक्टूबर को अष्टमी, 20 अक्टूबर को नवमी तथा 21 अक्टूबर को दशमी पूजा संपन्न होगी। दशमी के अवसर पर पारंपरिक सिंदूर खेला का आयोजन किया जाएगा तथा शाम को माँ दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम में ढाक की पारंपरिक धुनों के बीच माँ का आह्वान किया गया तथा आगमनी नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की गई। यह बंगाल की विशिष्ट पारंपरिक नृत्य शैली है, जिसमें माँ दुर्गा के आगमन और चंडी पाठ की कथा को नृत्य एवं संगीत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता है। कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रस्तुतियों का आनंद उठाया।
इस अवसर पर एसोसिएशन के प्रमुख तपन दास, के.डी. विश्वास, प्रवीर मित्रा, बिबाश डे, मृणाल कांति रॉय, जॉय बनर्जी, नीतू दत्ता, संजय मजूमदार, रूपेन सरकार सहित समाज के अनेक गणमान्य सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में बंगाली संस्कृति, परंपरा, भक्ति और सामाजिक एकता का सुंदर संगम देखने को मिला।