मंदिर नहीं जा सको तो घर को ही बना लो मंदिर : शास्त्री
...कोयला वाले हनुमान मंदिर पर कथा का पांचवा दिन
ग्वालियर। जब भी आपके नगर गांव के मंदिर में कोई उत्सव आयोजित हो तो जरूर सम्मिलित होना चाहिए। यदि मंदिर जाना संभव नहीं हो घर को ही मंदिर बनाकर उत्सव मनाना चाहिए। यह विचार पंडित शरद कुमार शास्त्री ने मोतीझील स्थित कोयला वाले हनुमान मंदिर पर आयोजित हो रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को व्यक्त किए। इस अवसर पर भगवान गोवर्धन की पूजा की गई।
सूर्य चंद्र की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि जिस पर भगवान सूर्य की कृपा होती है उनका आत्मबल मजबूत होता है। सूर्य की किरणों से हड्डियां मजबूत होती है इसलिए हमें नित्य प्रति सूर्य देव को जल देना चाहिए। चंद्रमा के बारे में उन्होंने कहा कि यह मां का कारक है । चंद्रमा खराब होने से मानसिक विकृति पैदा होती है इसलिए हमें चंद्र देव की भी उपासना करनी चाहिए। पूतना वध की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जो महिला दूसरों के बच्चों से ईर्ष्या रखती है वह पूतना के समान है । उन्होंने बताया कि पूतना का जब अंतिम संस्कार किया गया तो उसके शरीर से दुर्गंध की जगह सुगंध आ रही थी । जिस वस्तु या जीव का स्पर्श भगवान के चरणों से हो जाता है वह महकने लगता है । हमें भी प्रभु नाम का सुमिरन कर उनके चरणों की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए और जब हम प्रयास करेंगे तो निश्चित रूप से भगवान की कृपा हमें मिलेगी । इस मौके पर कथा आयोजक एवं मंदिर के पुजारी संतोष भैया, कथा संयोजक प्रेम बरौनिया, यजमान निर्मला मेघसिंह राजावात, शत्रुघन सिंह, लालूसिंह, राजाबेटी, टीकाराम सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भागवत महापुरुाण की आरती की।