गुरु पूर्णिमा और महर्षि सांदीपनि

(आर. एस. दिनकर)
 प्रदेश भर में 15 से 29 जुलाई "गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा उत्सव" विद्यालय स्तर पर मनाया जा रहा है.
• 29 जुलाई 2026 आषाढ़ पूर्णिमा,महर्षि सांदीपनि गुरु पर्व के रूप में व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा.
• गुरु की महिमा शिष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर तथा अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाना अवधारणा के साथ कार्यक्रम आयोजित किया जाना सुनिश्चित किया गया हैl
• संस्कृत विभाग, श्रीकृष्ण पाथेय न्यास, भोपाल द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की 64 कलाओं एवं 14 विद्याओं  पर केंद्रित भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति  की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई हैl
• महर्षि सांदीपनि सनातन धर्म के महान ऋषि और भगवान श्रीकृष्ण, बलराम एवं सुदामा के गुरु थेl
• उनके प्रसिद्ध आश्रम मध्य प्रदेश के उज्जैन / अवंती शहर में स्थित है,जहां उन्होंने अपने शिष्यों को 64 कलाओं और वेदों आदि का ज्ञान दियाl
• भागवत पुराण मे संदीपनी के संबंध में कथा का वर्णन मिलता है : संदीपनी के निवास पर विद्यार्थियों के रूप में रहते हुए श्रीकृष्णऔर बलराम तथा उनके मित्र सुदामा ने प्रत्येक पाठ को केवल एक बार ही ग्रहण किया था,फिर भी उन्होंने सभी पाठों में महारत हासिल कर ली थी l
•अपनी पढ़ाई शीघ्र पूरी करने पर उन्होंने अपने गुरु को अपने द्वारा चुने गए गुरु के दक्षिणा  मांगने के लिए राजी किया l
• तो संदीपनि ने अपने पुत्र की वापसी की प्रार्थना की जो प्रभास /सोमनाथ क्षेत्र समुद्र में लापता हो गया था l
• हरिवंश पुराण में,श्रीकृष्ण को पता चला कि गुरु के पुत्र को 'पांचजन' नामक असुर ने निगल लिया और उनकी मृत्यु हो गई थी l कृष्ण और उनके भाई यमलोक गए ताकि यम को अपने गुरु के पुत्र को जीवन दान देने के लिए मना सकें और वे सफल हुएl
 अर्थात् वे यमलोक से अपने गुरु के लंबे समय से लापता पुत्र को ले आए अतुलनीय शक्ति वाले कृष्ण की शक्ति से  संदीपनि का पुत्र जो बहुत पहले मर चुका था, अपने शरीर सहित लौट आयाl
 • निष्कर्ष: 
 सांदीपनि ऋषि परम तेजस्वी तथा सिद्ध ऋषि थे, सांदीपनि का अर्थ देवताओं का ऋषि होता हैl उज्जैन ऋषि सांदीपनि की तपस्थली रही यहाँ महर्षि ने घोर तपस्या की थी l इसी स्थान पर महर्षि सांदीपनि नें वेद,पुराण आदि की शिक्षा देते हुए आश्रम का निर्माण कराया थाl
• महाभारत,श्रीमद्भागवत, ब्रह्म पुराण,अग्नि पुराण आदि में सांदीपनि आश्रम का उल्लेख मिलता हैl
• गुरु महर्षि  सांदीपनि श्री कृष्ण की लग्न और मेहनत से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें जगतगुरु की उपाधि दी l
तभी से भगवान श्रीकृष्ण पहले जगतगुरु माने गए l
 •पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण 5500 वर्ष पूर्व द्वापर युग में  सांदीपनि आश्रम आए थे l
 •महर्षि सांदीपनि  श्रीकृष्ण और उनके भाई को 64 कलाओं तथा 14 विद्याओं का ज्ञान केवल 64 दिनों में ही ग्रहण करने से महर्षि आश्चर्यचकित हुए और कहा कि ऐसी तीव्र ग्रहण शक्ति  साधारण मानव में नहीं हो सकती,उन्होंने मां सरस्वती का आवाह्न किया तो आदेश मिला कि आप अपना पूरा ज्ञान इनके चरणों में डालकर अपना कल्याण करेंl
• तब महर्षि  ने कहा कि मैने तुम्हें जो विद्याएं और कलाएं सिखाई हैं, उनसे जीवन में विजय प्राप्त होती हैl
 अब मैं तुम्हें दिव्यकला / मरने की कला यानी मोक्ष प्राप्त करने की कला सिखाता हूं l महर्षि ने समझाया कि धर्म,अर्थ, काम और मोक्ष मेसे तीन पदार्थ प्राप्त कर सकते हैं .महान पदार्थ मोक्ष जो मरने पर प्राप्त हो सकता है यदि उसे मरने की कला आती है तो, जो है तो सहज पर कठिन! मोह,माया, ममता को भूलकर यदि श्रीहरि के चरणों में स्मरण करते हुए, जीवन छूटे तो मोक्ष  की प्राप्ति संभव! इसके लिए जीवनभर श्रद्धा के साथ स्मरण करने का अभ्यास जरूरी हैl
• सामाजिक समरसता के अग्रदूत जिनकी 650 वीं जयंती वर्षभर~31 मार्च 2027 तक आयोजित होनी है : संत शिरोमणि गुरु रविदास कहते हैं.
 "हरि सा हीरा छांड कै,  करे  आन की आस l
 ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषै  रविदास ll"
 अर्थात् हीरे से बहुमूल्य हरि को छोड़कर अन्य वस्तुओं की आशा करते हैं, यानी प्रभु की भक्ति को छोड़कर इधर- उधर भटकना व्यर्थ है l
 [लेखक : गुरु रविदास आश्रम, पेशे से शिक्षक है ]
•शास. मॉडल हा. से. स्कूल गोहद (भिंड ).

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