पांडुलिपियों की खोज सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित पहुंचाने का प्रयास: कलेक्टर श्रीमती चौहान

ग्वालियर ।  जिले में भी निजी शोध संस्थानों, महाविद्यालयों, ग्रंथालयों, मंदिरों, मठ-आश्रमों और निजी ट्रस्टों में सुरक्षित प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों की खोज कर उनकी जानकारी “ज्ञान भारतम्” एप पर अपलोड करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने इस अभियान के संचालन के लिए गठित “ज्ञान भारतम् जिला स्तरीय समिति” की बैठक लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।  
सोमवार को कलेक्ट्रेट के सभागार में आयोजित हुई बैठक में कहा कि यह केवल पांडुलिपियों अर्थात हस्तलिखित दस्तावेजों का संरक्षण ही नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने बैठक के माध्यम से नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां उपलब्ध हैं तो वे उनकी जानकारी साझा कर इस राष्ट्रीय अभियान में सहयोग करें। साथ ही बैठक में मौजूद अधिकारियों से कहा कि वे भी अधिक से अधिक पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण में सहयोग करें। इस रचनात्मक अभियान की जानकारी अधिकाधिक नागरिकों तक पहुँचे, जिससे मिशन की मंशा के अनुरूप पांडुलिपियों का संरक्षण हो सके। 
कलेक्टर श्रीमती चौहान ने कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने की महत्वपूर्ण पहल है। जिले में उपलब्ध प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उनका दस्तावेजीकरण, संरक्षण और डिजिटलीकरण किया जा रहा है। जिला स्तरीय समिति के नोडल सदस्य एवं ललित कला महाविद्यालय के प्रशासनिक प्रभारी गिर्राज शर्मा ने बताया कि जिले में यह अभियान गत 16 मार्च  से शुरू हुआ था और 15 जून तक जारी रहेगा। अभियान के तहत जिले में स्थित निजी संस्थानों, पुस्तकालयों, मंदिरों, आश्रमों और ट्रस्टों में सुरक्षित पांडुलिपियों की जानकारी एकत्र कर “ज्ञान भारतम्” एप पर अपलोड की जा रही हैं। 

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