ग्वालियर। व्यापार समिति दाल बाजार के पूर्व अध्यक्ष गोकुल बंसल निलंबन के बाद बुरी तरह बौखला गए हैं। उन्हें बाजार की न्याय समिति की अनुशंसा पर गबन करने पर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। निलंबन के खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने इस मामले को फर्म्स एण्ड सोसायटी के कार्य क्षेत्र का मानते हुए निराकरण करने के आदेश हुए हैं। सोसायटी द्वारा इस मामले की 14 मई को सुनवाई की गई। जिसमें श्री बंसल अपने अभिभाषक अतिरिक्त लोक अभियोजक घनश्याम मंगल के साथ उपस्थित हुए और आरोप लगाया कि व्यापार समिति ने उन्हें कभी सुनवाई का मौका नहीं दिया। इतना ही नहीं उन्होंने न्याय समिति के आस्तित्व से ही इंकार कर दिया । जबकि अध्यक्ष रहते इसी न्याय समिति से उन्होंने कई निर्णय कराए थे। उनके आरोपों का प्रतिवाद व्यापार समिति दाल बाजार के अध्यक्ष दिलीप पंजवानी सचिव विवेक जैन लिल्ले एवं पंकज गोयल ने किया। इन्होंने तमाम बैठकों के दस्तावेज पेश किए जिसमें गोकुल बंसल को कई बार नोटिस देकर सुनवाई का मौका देने और न्याय समिति के समक्ष उपस्थित रहने की बात कही।
जबकि बंसल का कहना था कि उन्हें न्याय समिति ने कभी नहीं बुलाया। एक दिन बाजार से मैं गुजर रहा था तब फोन करके वैसे ही बुला लिया। मेरे जिस राशि को लेने की बात कही गई है उसकी लिखित पावती हो तो बताएं। इस पूरे विषय को लेकर शनिवार को व्यापार समिति और न्याय समिति की संयुक्त कार्यकारिणी बैठक सदावृत की बगिया कार्यालय पर आयोजित की गई। जिसमें बंसल द्वारा न्याय समिति को लेकर कहे गए शब्दों को जब सबके समक्ष रखा गया तो उसकी घोर निंदा की गई। सचिव विवेक जैन का दुःखी मन से कहना था कि पैसों की जरा सी बात को लेकर वे इतना झूठ फैला सकते हैं किसी ने सोचा भी नहीं था। उन्होंने न्याय समिति के बुजुर्ग वरिष्ठ व्यापारियों तक की बात नहीं रखकर उनका अपमान किया है। तब सबने एक स्वर में ऐसे व्यक्ति का साथ ना देकर एकजुटता से निर्णय लेने की बात कही। बैठक में अध्यक्ष दिलीप पंजवानी, सचिव विवेक जैन, न्याय समिति के हरिबाबू गोयल, सुरेश खत्री, कृष्ण गोपाल अग्रवाल, ओमप्रकाश अग्रवाल, कैलाशचन्द्र गर्ग, ओमप्रकाश गुप्ता के अलावा संजय बंसल, सुनील गर्ग बबलू, मनीष बांदिल, महेन्द्र साहू, प्रदीप सिंघल आदि उपस्थित रहे।