जीवाजी विश्वविद्यालय में धूमधाम से मनाया गया गुरू पूर्णिमा पर्व

ग्वालियर। गुरु ही व्यक्ति को अज्ञानता से निकालकर प्रकाश रूपी ज्ञान की तरफ ले जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस तिथि पर महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ है। वेद व्यास जी ने पहली बार इस जगत को चारों वेदों का ज्ञान दिया था। महर्षि वेदव्यास को प्रथम गुरु की उपाधि दी गई हैं।जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए वही गुरु है। समस्त दोषों को समाप्त कर गुणों को विकसित करता है वही गुरु है। जीवन जीने की कला सिखाने का नाम गुरु है।छात्रों में समग्र विकास कर समाज में स्थापित होने का नाम गुरु है।छोटा सा बालक गुरु के सानिध्य में आकर ही राम बनता है यही गुरु की महिमा है।समाज और राष्ट्र को दिशा देने का काम करने वाला ही गुरु होता है।यह बात गुरुवार को जेयू के गालव सभागार में आयोजित गुरू पूर्णिमा के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डॉ.नीतेश शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि कही। वहीं अध्यक्षता जेयू के प्रभारी कुलगुरू प्रो. शांतिदेव सिसौदिया ने की।प्रो.जेएन गौतम के स्वागत भाषण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो.एसके शुक्ला ने कहा कि गुरु छात्र की क्षमता को पहचानकर उसे निखारने का काम करते हैं। छात्रों की प्रगति पर सबसे ज्यादा खुशी गुरु को ही होती है।प्रोफेसर एसके सिंह ने कहा कि गुरु शिष्य को कुछ नया नहीं बताता बल्कि जो उसके अंदर है इसका बोध कराता है।कुलसचिव डॉ.राकेश कुशवाहा ने कहा कि छात्रों में शिक्षक के प्रति नम्रता का भाव होना चाहिए। छात्रों में सीखने की जिज्ञासा जागृत कर दे वही गुरु होता है। प्रभारी कुलगुरू प्रो. शांतिदेव सिसौदिया ने कहा कि इस पावन दिन पर गुरु, माता-पिता और धर्म ग्रंथों की पूजा से व्यक्ति को सुख और शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही कभी न समाप्त होने वाला ज्ञान भी प्राप्त होता है।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉक्टर शिव कुमार शर्मा ने कहा कि जीवन जीने की कला हमेशा गुरू ही सिखा सकता है।जीवन के मूल्य का महत्व गुरु सिखाता है। छात्रों को श्रेष्ठ और पुष्ट बनाना गुरु का काम है। छात्रों की कमजोरी को ताकत बना दे वही गुरु होता है। आप श्रेष्ठ तो बन सकते हैं लेकिन श्रेष्ठ इंसान गुरु ही बना सकता है। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों व गुरूओं को शाल श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन आदर्श व आभार प्रो.जेएन गौतम ने व्यक्त किया।इस अवसर पर प्रो. आईके पात्रो,प्रो. एसके सिंह,प्रो. मुकुल तेलंग,प्रो. विवेक बापट,प्रो. हेमंत शर्मा, डॉ. सुमन जैन, डॉ. हरिशंकर कंसाना सहित समस्त शिक्षक व छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

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