डॉ. पापरीकर की 10वीं पुण्यतिथि पर दी भावभीनी श्रद्धांजलि
ग्वालियर। समाजसेवी डॉ. रघुनाथ राव पापरीकर की 10वीं पुण्यतिथि पर शिवाजी पार्क स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूर्व महासचिव मध्यप्रदेश कांग्रेस दुष्यंत साहनी ने कहा कि डॉ. पापरीकर जी ग्वालियर के पूर्व महापौर एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ एक ऐसे जनसेवक थे, जिनका संपूर्ण जीवन शहर के विकास, सामाजिक सरोकारों और जनकल्याण के लिए समर्पित रहा।
दुष्यंत साहनी ने कहा कि नेहरू उद्यान, शिवाजी उद्यान, लाल-बाल-पाल की प्रतिमाएँ, शंकराचार्य जी की प्रतिमा एवं कांग्रेस भवन जैसे अनेक कार्यों में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। मानस भवन, मध्यप्रदेश मूक-बधिर कल्याण संस्था, छत्रपति शिवाजी स्मारक समिति एवं संगीत समिति जैसी संस्थाओं से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा। वे अनेक संस्थाओं के आजीवन निर्विरोध अध्यक्ष रहे। उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी कि उनके लिए राजनीति का अर्थ सत्ता नहीं, बल्कि जनसेवा और शहर का विकास था। केंद्र में हो या प्रदेश में, किसी भी दल की सरकार रही हो, वे ग्वालियर के विकास और जनहित के कार्यों के लिए निरंतर प्रयासरत रहते थे। उनके व्यक्तित्व और जनसेवा के प्रति समर्पण का ही प्रभाव था कि विपक्षी दलों के नेता और अधिकारी भी उनका सम्मान करते थे। पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी भी उन्हें विशेष आदर देते थे। उन्होंने कभी अपने निजी स्वार्थ के लिए किसी से कोई काम नहीं कहा। उनकी चिंता सदैव आमजन की समस्याओं, शहर के विकास और समाज के हितों को लेकर रहती थी। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान और उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पूँजी थी।
उन्होंने कहा कि मेरा उनसे परिचय वर्ष 1986 में हुआ, जब मैं पहली बार एनएसयूआई का महासचिव मनोनीत हुआ। लेकिन वर्ष 2000 से लेकर उनके अंतिम समय तक लगभग 16 वर्षों का उनका निकट सानिध्य मेरे जीवन की अमूल्य धरोहर है। उनके साथ देशभर के बड़े-बड़े नेताओं से मिलना, उनसे संवाद करने की कला सीखना और जनमानस के कार्यों के लिए संघर्ष करना तथा निरंतर प्रयासरत रहना मैंने उन्हीं से सीखा। मैं और आर.पी. सिंह स्वयं को उनका दीक्षित शिष्य मानते हैं। मेरे लिए तो उनका रिश्ता केवल गुरु और शिष्य का नहीं था मैं स्वयं को उनका दत्तक पुत्र ही नहीं मानता था, बल्कि वे और पूरा शहर मुझे उनका दत्तक पुत्र मानता था। उनका स्नेह, विश्वास, मार्गदर्शन और साथ मेरे जीवन की ऐसी पूँजी है, जिसे समय कभी कम नहीं कर सकता।
आज उनकी 10वीं पुण्यतिथि पर उन्हें स्मरण करते हुए मन भावुक है। उनका व्यक्तित्व, उनके संस्कार, उनकी कार्यशैली और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव मेरे लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। ईश्वर से प्रार्थना है कि श्रद्धेय पापरीकर जी ब्रह्मांड में जहाँ कहीं भी हों, सदैव प्रसन्न रहें और हम सभी को अपने आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन से प्रेरित करते रहें। आपका स्नेह, आपका विश्वास और आपके दिए संस्कार सदैव मेरे साथ रहेंगे। श्रद्धेय डॉ. रघुनाथ राव पापरीकर जी को शत-शत नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि।