लोग केवल संगठन का हिस्सा नहीं, बल्कि उसकी गतिशील शक्ति होते हैंः अविनाश मिश्रा
- समस्या-समाधान, पेशेवर जीवन की अहम क्षमताः समीर सेठ
- लक्ष्य हासिल कर लेना प्रक्रिया का अंत नहीं है, नए मानक और चुनौतियां संगठन को निरंतर बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाती हैंः संतोष पाठक
- निरंतर सुधार केवल विनिर्माण क्षेत्र तक सीमित नहीं है, इसे शिक्षा, सेवाओं, खेल और दैनिक जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता हैः एसके सतपथी
- कक्षा में प्राप्त ज्ञान को कार्यस्थल की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ना इस एचार काॅन्क्लेव का उद्देश्य हैः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
- आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में हुआ एचआर काॅन्क्लेव का आयोजन
ग्वालियर। आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में स्कूल आफ बिजनेस एंड लीडरशिप द्वारा क्वालिटी सर्कल फोरम आफ इंडिया (क्यूसीएफआई) के सहयोग से ‘कक्षा से आगेः गुणवत्ता, नवाचार और सतत सुधार की संस्कृति का निर्माण‘ विषय पर ‘एचआर काॅन्क्लेव‘ का आयोजन किया गया। संस्थान के तुरारी परिसर स्थित उस्ताद अलाउद्दीन खां सभागार में आयोजित ‘एचआर काॅन्क्लेव‘ में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय, आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के मेंटर और क्यूसीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाश मिश्रा, क्यूसीएफआई के ग्वालियर चैप्टर के सचिव और एसआरएफ इंडस्ट्रीज के एचआर प्रमुख संतोष पाठक, क्यूसीएफआई के ग्वालियर चैप्टर के सीओओ थाॅमस मैथ्यू, क्यूसीएफआई के ग्वालियर चैप्टर के अध्यक्ष और जेके टायर में वाइस प्रेसिडेंट (वक्र्स) एसके सतपथी, आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस और मोडलाइज व आईटीसी के पूर्व एचआर लीडर समीर सेठ सहित विभिन्न विशेषज्ञों में सहभागिता की। इस अवसर स्कूल आफ बिजनेस एंड लीडरशिप की विभागाध्यक्ष सुश्री अमेया चौहान, डाॅ. राखी चौहान (आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में क्यूसीएफआई की नोडल आफिसर) सहित विभिन्न प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में स्कूल आफ बिजनेस एंड लीडरशिप द्वारा आयोजित ‘एचआर काॅन्क्लेब‘ में विशेषज्ञ अविनाश मिश्रा (क्यूसीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष) ने डिजिटल परिवर्तन, तकनीकी व्यवधान, साइबर जोखिम, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, लागत के दबाव और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच संगठनों के सामने आने वाली चुनौतियों पर छात्र-छात्राओं का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवसाय की सफलता में उत्पाद, प्रक्रियाएं और लाभ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन इन सभी के केंद्र में मानव संसाधन होता है। लोग केवल संगठन का हिस्सा नहीं, बल्कि उसकी गतिशील शक्ति होते हैं। वे अपने विवेक, रचनात्मकता, संवेदनशीलता और नए अवसरों की कल्पना करने की क्षमता से संगठन को नई दिशा देते हैं। तकनीक कार्यों को गति और दक्षता दे सकती है, लेकिन मानवीय समझ, नवाचार और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता किसी भी संगठन की दीर्घकालिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण बनी रहती है। ‘एचआर काॅन्क्लेव‘ में विशेषज्ञ प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस समीर सेठ ने कहा कि संगठन केवल डिग्री के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्ति की समस्या सुलझाने की क्षमता के आधार पर भी उसका मूल्यांकन करते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं को जिज्ञासु बने रहने, प्रश्न पूछने और समाधान तलाशने से पहले यह समझने के लिए प्रेरित किया कि किसी समस्या से कौन-कौन प्रभावित हो रहा है। चर्चा में मार्गदर्शन (मेंटॉरशिप) की भूमिका पर भी जोर दिया गया, जो आत्मविष्वास, ज्ञान और पेशेवर निर्णय-क्षमता विकसित करने में मदद कर सकती है।
‘एचआर काॅन्क्लेव‘ में विशेषज्ञ संतोष पाठक (क्यूसीएफआई के ग्वालियर चैप्टर के सचिव और एसआरएफ इंडस्ट्रीज के एचआर प्रमुख) ने बताया कि क्यूसीएफआई काइजेन, 5एस, प्लान-डूचेक-एक्ट (पीडीसीएस), स्टैंडर्डाइज-डू-चेक-ऐक्ट (एसडीसीए) और मूल कारण विश्लेषण जैसी व्यावहारिक विधियों को बढ़ावा देता है। इन तरीकों से टीमें कार्यस्थल को व्यवस्थित कर सकती हैं, अक्षमताओं की पहचान कर सकती हैं, समस्याओं के वास्तविक कारणों को समझ सकती हैं और सुधारों को व्यवस्थित रूप से परख सकती हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं को अपने विष्वविद्यालय परिसर में भी गुणवत्ता की संस्कृति विकसित करने के लिए गुणवत्ता मंडल (क्वालिटी सर्कल) बनाने और बार-बार सामने आने वाली समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया। पीडीसीएस चक्र को किसी बदलाव की योजना बनाने, उसे लागू करने, परिणामों की जांच करने और प्राप्त सीख के आधार पर अगला कदम तय करने की संरचित प्रक्रिया के रूप में समझाया गया। एसडीसीए को मानक प्रक्रियाओं में निरंतरता बनाए रखने और उसके बाद सुधार के अगले चक्र की ओर बढ़ने के तरीके के रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य हासिल कर लेना प्रक्रिया का अंत नहीं है, नए मानक और चुनौतियां संगठन को निरंतर बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाती हैं।
‘एचआर काॅन्क्लेव‘ में विशेषज्ञ एसके सतपथी (क्यूसीएफआई के ग्वालियर चैप्टर के अध्यक्ष और जेके टायर में वाइस प्रेसिडेंट (वक्र्स)) ने अकादमिक अवधारणाओं को उद्योग की वास्तविक समस्याओं पर लागू करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को आंकड़ों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाने, पहल करने और बड़ी चुनौतियों को छोटे तथा प्रबंधनीय हिस्सों में बांटकर हल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि निरंतर सुधार केवल विनिर्माण क्षेत्र तक सीमित नहीं है, इसे शिक्षा, सेवाओं, खेल और दैनिक जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है। ‘एचआर काॅन्क्लेव‘ में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय ने कहा कि इस एचाआर काॅन्क्लेव का उद्देश्य कक्षा में प्राप्त ज्ञान को कार्यस्थल की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ना है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि अकादमिक योग्यता से आगे बढ़कर समस्याओं की पहचान करने, तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर काम करने एवं व्यावहारिक सुधार लागू करने की क्षमता विकसित करें। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता केवल नीतियों से सुनिश्चित नहीं होती, यह तब विकसित होती है जब लोग अपने काम की जिम्मेदारी लेते हैं और रोजमर्रा की कार्यप्रणाली में सुधार को स्थान देते हैं।
‘एचआर काॅन्क्लेव‘ में स्कूल ऑफ बिज़नेस एंड लीडरशिप की विभागाध्यक्ष सुश्री अमेया कहा कि उत्कृष्टता लोगों, प्रतिबद्धता और निरंतर सुधार की सोच से निर्मित होती है। चर्चा में मानव संसाधन की बदलती भूमिका पर भी विचार किया गया, जो अब भर्ती तक सीमित न रहकर कर्मचारी विकास, संगठनात्मक संस्कृति और क्षमताओं के निर्माण तक विस्तृत हो चुकी है। वहीं इससे पहले सत्र के आरंभ में डॉ. राखी चैहान ने बदलते व्यावसायिक परिवेश और कक्षा से परे निरंतर सीखने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वहीं वक्ताओं ने क्यूसीएफआई को रोजगार-योग्यता विकसित करने, भविष्य के नेतृत्व को प्रोत्साहित करने और छात्र-छात्राओं को विभिन्न स्तरों पर अपने विचार तथा परियोजनाएं प्रस्तुत करने का अवसर देने वाले मंच के रूप में भी रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने छात्र-छात्राओं से गुणवत्ता-प्रबंधन की अवधारणाओं को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखने, बल्कि वास्तविक समस्याओं की पहचान और समाधान में सक्रिय भागीदारी करने का आव्हान किया। वहीं एचआर काॅन्क्लेव के समापन पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय का आभार-संदेश के साथ हुआ। इससे पहले अतिथियों द्वारा कैटलिस्ट क्लब के छात्र-छात्राओं सदस्यों का सम्मान किया।