ताइवान प्रतिनिधि ने एरोपोनिक, हाइड्रोपोनिक, जैविक प्रयोगशाला और जीन बैंक का किया अवलोकन
ग्वालियर। ताइवान के भारत में प्रतिनिधि एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर प्रो. मुमिन चेन ने बुधवार को राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय का भ्रमण किया। विश्वविद्यालय में वैदिक परंपरा, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों और अनुसंधान के समन्वय को देखकर वे प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में जितना शोध और नवाचार उन्होंने देखा, वह उनकी अपेक्षा से कहीं अधिक है।
प्रो. चेन ने कुलपति डॉ. अरविन्द कुमार शुक्ला से मुलाकात कर कृषि अनुसंधान, नवाचार तथा तकनीकी आदान-प्रदान की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने विश्वविद्यालय के विभिन्न नवाचारों में रुचि दिखाई और ताइवान में भी इन तकनीकों के उपयोग की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने विश्वविद्यालय के साथ शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग के लिए अनुबंध करने की इच्छा जताते हुए कुलपति को ताइवान आने का निमंत्रण दिया। भ्रमण के दौरान प्रो. चेन ने विश्वविद्यालय के वैदिक गांव का अवलोकन किया। यहां उन्होंने मिट्टी, बांस और पेड़ पर बने घर देखे तथा तालाब में मछलियों और बत्तखों को दाना खिलाया। इसके बाद उन्होंने एरोपोनिक एवं हाइड्रोपोनिक इकाई, नाइट्रोजन गैस प्लांट, एग्रीकल्चर वेस्ट (खेती का कचरा) प्लांट, गौशाला, बीजा और जीवा अमृत प्लांट ,हाईटेक नर्सरी, जैविक प्रयोगशाला और जीन बैंक का निरीक्षण किया। प्रो. चेन ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के इस समन्वय की सराहना करते हुए कुलपति एवं विश्वविद्यालय की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि में परंपरागत पद्धतियों के साथ तकनीकी नवाचार का संयोजन महत्वपूर्ण है।
कुलपति डॉ. शुक्ला ने प्रो. चेन को पुनः विश्वविद्यालय आने का निमंत्रण दिया और अगली यात्रा में विश्वविद्यालय के मड हाउस में ठहरने की बात कही।