भोपाल| मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश में अग्निशमन व्यवस्था को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से नया फायर एक्ट लागू कर दिया है। इस एक्ट के तहत अब आग लगने की सूचना पर दमकल टीम को 10 मिनट के अंदर मौके पर पहुंचना अनिवार्य होगा। दमकलकर्मियों की लापरवाही पाए जाने पर 3 महीने तक की जेल का प्रावधान किया गया है।
नए प्रावधानों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की असावधानी से आग लगती है और उससे आसपास की संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो नुकसान की पूरी भरपाई दोषी व्यक्ति को ही करनी होगी। वहीं झूठी सूचना देने वालों पर सख्ती बरतते हुए 20,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। नए एक्ट में व्यावसायिक परिसरों, अस्पतालों और ऊंची इमारतों में प्रशिक्षित फायर सुपरवाइजर की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गई है। 30 दिनों के भीतर नियुक्ति नहीं करने पर 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से पेनल्टी और उसके बाद 10,000 रुपये प्रतिदिन का दंड वसूला जाएगा। सेफ्टी ऑडिट, फायर प्लान और सर्टिफिकेशन के लिए शासन द्वारा अधिकृत निजी एजेंसियों को लाइसेंस दिया जाएगा। 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले आवासीय भवन, अस्पताल, स्कूल, मॉल और कारखानों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य कर दी गई है। एनओसी के बिना नगरीय निकाय ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं करेंगे।
सघन आबादी और औद्योगिक क्षेत्रों को देखते हुए पुलिस थानों की तर्ज पर नए फायर स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा, जिनकी स्पष्ट सीमा और कमान व्यवस्था होगी। वैवाहिक, राजनीतिक और धार्मिक आयोजनों के पंडालों को सेल्फ-रेगुलेटरी श्रेणी में रखा गया है।आयोजकों के लिए अग्निरोधी कपड़ों का उपयोग और पंडाल में चौड़े निकास द्वार रखना अनिवार्य होगा। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों को संपत्ति कर के साथ फायर टैक्स वसूलने का अधिकार दिया गया है। इसकी दरें राज्य शासन द्वारा निर्धारित की जाएंगी।