विद्यार्थियों द्वारा अर्जित ज्ञान देश की अमूल्य निधि होती है: राज्यपाल पटेल

- कृषि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह आयोजित, 666 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं 
ग्वालियर ।  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से आह्वान करते हुए कहा कि आप सबने जो ज्ञान और कौशल हासिल किया है, वह आपकी व्यक्तिगत उपलब्धि भर नहीं है। यह देश के विकास की अमूल्य निधि है। साथ ही नई जिम्मेदारियों और नई संभावनाओं का पड़ाव भी है। राज्यपाल पटेल राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के द्वादश (12वे) दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि शिक्षा से आप सबने जो संस्कार सीखे हैं, उन्हें अपने आचरण में भी उतारें। राज्यपाल ने कहा कि अपने ज्ञान का उपयोग ऐसी कृषि व्यवस्था बनाने में करें जो पर्यावरण के अनुकूल हो। साथ ही खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें और भावी पीढ़ियों का भविष्य संवारे। दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदकों सहित कुल 666 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। 
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित हुए दीक्षांत समारोह में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी बतौर विशिष्ट अतिथि मंचासीन थे। साथ ही विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, प्रमंडल के सदस्यगण, कुलसचिव श्री अजय कौशल एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष भी मंचासीन थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि कृषि शिक्षा की सार्थकता देश की मिट्टी, जल, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा के संरक्षण के साथ करोड़ों किसानों की खुशहाली सुनिश्चित करने में है। उन्होंने कहा वर्तमान में कृषि का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। बदलाव के इस दौर में विज्ञान, तकनीक और नए विचारों के सहारे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, घटती जोत, मिट्टी की सेहत और जल संकट जैसी वर्तमान चुनौतियों के समाधान खोजकर उत्पादन की अस्थिरता को खत्म करना होगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कृषि विद्यार्थियों से कहा कि आपकी असली परीक्षा प्रयोगशाला के शोध पत्रों में नहीं अपितु ड्रोन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव तकनीक जैसी आधुनिक विधियों को खेतों तक ले जाने में है। 
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि फास्ट फूड के सेवन से बचें और मिलेट्स (मोटे अनाज) को अपने भोजन में प्रमुख स्थान दें। स्वस्थ रहकर ही हम अपने सफल जीवन के साथ-साथ समाज व देश के निर्माण में योगदान दे सकते हैं। राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त सभी विद्यार्थियों को बधाई व शुभकामनायें दीं। साथ ही कहा कि हमें भरोसा है कि आप अपनी शिक्षा, प्रतिभा और समर्पण से कृषि क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर विकसित भारत के संकल्प को गति देंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने दीक्षांत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि खेती केवल व्यवसाय ही नहीं, हमारी संस्कृति की जीवन पद्धति भी है। कुलकर्णी ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति में समाहित पंच महाभूतों के साथ तालमेल बिठाकर किसानों को खेती करने के लिये प्रेरित करें। विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने दीक्षोपदेश दिया। साथ ही विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत कर विश्वविद्यालय में हुए नवाचारों एवं उन्नत कृषि के लिये किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। दीक्षांत समारोह में कृषि विश्वविद्यालय के 4 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। जिनमें सुश्री नम्रता द्विवेदी पीएचडी, सुश्री ह्रदी भट्टाचार्य स्नातकोत्तर कृषि, अभय शर्मा कृषि स्नातक व प्रत्यक्ष खटीक स्नातक उद्यानिकी शामिल हैं। इसके अलावा तीन विद्यार्थियों को सिरताज बहादुर सिन्हा स्मृति नगद पुरस्कार प्रदान किया गया। जिनमें सुश्री श्रृष्टि बाला साहेब खांडेकर, सुश्री प्रजिकता कटारे व श्री सूरज कुमार दीक्षित शामिल हैं। 
दीक्षांत समारोह में गत 01 अक्टूबर 2025 से 30 सितम्बर 2026 के बीच उपाधि पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें स्नातक के 345 स्नातकोत्तर के 294 एवं पीएचडी के 27 विद्यार्थियों सहित कुल 666 विद्यार्थियों को मिली उपाधि शामिल हैं। आरंभ में राज्यपाल मंगुभाई पटेल के मुख्य आतिथ्य में शोभा यात्रा मंच पर पहुँची। राज्यपाल मंगुभाई पटेल सहित अन्य अतिथियों ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व पुष्प अर्पित कर दीक्षांत समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के शुभारंभ व समापन अवसर पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् व राष्ट्रगान जन-गण-मन का गायन हुआ। दीक्षांत समारोह में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे तथा जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत भी मौजूद थे। 

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