BREAKING!
  • सोनागिर सिद्ध क्षेत्र पर विराट अहिंसा रैली एवं मुनिश्री के केशलोच समारोह 4 अक्तूबर को
  • रोजगार मूलक शिक्षा पद्धति से दूर होगी बेरोजगारी - प्रो डा भरत शरण सिंह
  • प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा से रामलाल रौतेल ने की सौजन्य भेंट, प्रदेश की परिस्थितियों पर की चर्चा
  • गांधी जयंती पर स्काउट की सर्वधर्म प्रार्थना सभा होगी
  • महात्मा गाँधी जयंती पर समाजवादी पार्टी का मौन सत्याग्रह
  • भारतीय मजदूर संघ ने राकेश चतुर्वेदी को दी श्रद्धांजलि
  • हिन्दू नेताओं की सीबीआई की अदालत से बरी होना असत्य पर सत्य की जीत : भदौरिया
  • पवैया के दोष मुक्त होने पर खुशी, अभिनंदन होगा
  • जनसंपर्क विभाग के गुलाटी हर समस्या का समाधान थे : संपादक व पत्रकार
  • पूर्व मंत्री पवैया अयोध्या प्रकरण के अंतिम फैसले में उपस्थित होने आज लखनऊ रवाना हुए

Sandhyadesh

ताका-झांकी

काउंसलिंग बाल सरंक्षण औऱ पुनर्वास का निर्णायक तत्व है: शिवानी सरकार

11-Aug-20 35
Sandhyadesh

*चाइल्डलाइन औ सीडब्ल्यूसी का समन्वय बाल हित की अनिवार्यता: अर्चना सहाय
* सीसीएफ की ई संगोष्ठी में बोले विषय विशेषज्ञ
बाल कल्याण समिति जिला ग्वालियर के अध्यक्ष डॉ के के दीक्षित ने जानकारी दी, गत दिवस आयोजित वेबीनार में, बाल सरंक्षण के समेकित प्रकल्प में काउंसलिंग का बहुत ही गहरा औ दूरदर्शी महत्व है।यह कार्य बेहद संवेदनशील और प्रोफेशनल एथिक्स की बुनियाद पर टिका है इसलिए काउंसलर को अपना काम पूरी निष्ठा के साथ मानक प्रविधि के साथ करना चाहिए। यह मार्गदर्शन चाइल्ड कन्जर्वेशन फाउंडेशन की ई संगोष्ठी में शिवानी सरकार ने दिया।
इस ई संगोष्टी में देश भर के सीडब्ल्यूसी, जेजेबी सदस्य एवं स्वतन्त्र बाल अधिकार कार्यकर्ता जुड़े हुए थे।देश की प्रतिष्ठित बाल परामर्शदात्री श्रीमती सरकार ने बताया कि काउंसलिंग किसी भी सरंक्षण औऱ जरूरतमंद श्रेणी के बालक के भविष्य को पुनर्वास करने के मामले में निर्णायक साबित होने वाला पक्ष है क्योंकि भटकाव का शिकार बालक को अपने हित का वास्तविक भान नही रहता है और अक्सर मासूमियत के चलते बालक भटक जाते है।इन परिस्थितियों में एक प्रोफेशनल काउंसलर की भूमिका जेजे एक्ट में निर्णायक श्रेणी में आ जाती है।उन्होंने बताया कि बालक की मनःस्थिति को जानने के लिए काउंसलर को खुद उस बालक की मनःस्थिति में पहुँचकर संवाद की शुरुआत करनी चाहिये।श्रीमती सरकार ने बताया कि अपनत्व  का भाव चिन्हित बालक के मन मस्तिष्क में  पारस्परिक एकाकार का अहसास कराने में सफल होगा तभी घटना के मुलकारक को पकड़ा जा सकता है।भयमुक्त संवाद के लिए बालक के साथ अटैचमेंट की सीमाओं का भी ध्यान रखना एक सफल परामर्शदाता का गुण होता है लेकिन यह अटेच डिटैच की बुनियाद पर होना चाहिये।उन्होंने बताया कि सफल काउन्सलर को बालक के साथ विश्वनीय संवाद बनाने के लिए उन अनुभवों को साझा करना चाहिये जो स्वयं उसके निजी जीवन मे भी उन्ही परिस्थितियों में घटित हुए है।श्रीमती सरकार ने सभी सबंधित काउंसलरों से आग्रह किया कि वे मानक प्रक्रिया औऱ ईमानदारी के साथ बाल सुलभ माहौल में इस काम को करने का संकल्प लें।
ई संगोष्ठी को भोपाल चाइल्ड लाइन औऱ आरम्भ संस्था से जुड़ी श्रीमती अर्चना सहाय ने भी संबोधित किया।उन्होंने सीडब्ल्यूसी एवं चाइल्डलाइन के मैकेनिज्म पर विस्तार से प्रकाश डाला औऱ बताया कि दोनों की मौजूदा भूमिका एक दूसरे के पूरक के रूप में है।उन्होंने बताया कि चाइल्डलाइन की शुरूआत टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के एमएसडब्लू के विद्यार्थियों की मुंबई में फील्ड स्टडी के अनुभवों से हुई थी।आरम्भ में यह केवल स्टेशन और फुटपाथों पर रहने वाले बच्चों के लिये शुरू हुआ था।1098 टोलफ्री नम्बर की कहानी भी उन्होंने रोचकता के साथ बताई।श्रीमती सहाय ने बताया कि जहां सीडब्ल्यूसी और चाइल्डलाइन समन्वय के साथ काम कर रहे है वहां जेजे एक्ट की भावना के अनुरूप बालकों के हितों पर परिणामोन्मुखी नतीजे आ रहे है इसलिये समन्वय पर सम्मिलित प्रयास सभी की प्राथमिकता होनी चाहिये।उन्होंने बताया कि 1098 का प्रचार मैदानी स्तर पर धीरे धीरे हो रहा है लेकिन समाज मे यह धारणा नही निर्मित होनी चाहिये कि बच्चों से जुड़े मामले केवल चाइल्डलाइन को ही देखने है।जेजे एक्ट सभी नागरिकों से बालकों के प्रति वहीं जबाबदेही की अपेक्षा रखता है जो चाइल्डलाइन के लिये विहित है।
श्रीमती सहाय ने आशा जताई कि आने वाले समय में जेजे एक्ट  के प्रति जागरूकता औऱ जबाबदेही पुलिस एक्ट की तरह समाज के अंतिम छोर तक स्थापित होगी। ई संगोष्ठी के आखिरी सत्र में दोनों विषय विशेषज्ञों द्वारों प्रतिभागियों के तमाम सवालों के जबाब दिए गए।संगोष्ठी के सूत्रधार डॉ कृपाशंकर चौबे ने बताया कि सीसीएफ की अगली ई संगोष्ठी में आईपीसी एवं सीआरपीसी के प्रावधानों पर चर्चा के लिए सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट आमंत्रित किये गए है। अंत में विषय विशेषज्ञों का आभार फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र शर्मा ने व्यक्त किया।इस ई संगोष्ठी में मप्र, यूपी, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश के बाल अधिकार कार्यकर्ता जुड़े रहे।

Popular Posts