जिसे सुनकर मन में ब्रह्म की स्थापना हो जाए वो कथा: पं शास्त्री
पुरानी छावनी जय रामेश्वर मंदिर पर आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन
ग्वालियर। निगमकल्पतरोर्गलितं फलं शुकमुखादमृतद्रवसंयुतम् । पिबत भागवतं रसमालयं मुहुरहो रसिका भुवि भावुका: ॥ अर्थात हे रस के मर्मज्ञ, भावुक एवं रसिक भक्तजनों! यह श्रीमद्भागवत रूपी ग्रंथरत्न, वेदरूपी कल्पवृक्ष का पका हुआ अत्यंत दुर्लभ फल है। शुकदेवजी (श्रीशुक) के मुख से स्पर्श हो जाने के कारण यह अमृत रस से पूरी तरह परिपूर्ण हो गया है। पृथ्वी पर उपलब्ध इस आनंदमयी और रस से भरे भागवत रूपी फल का जीवन भर बार-बार पान (श्रवण/पठन) करते रहो। पुरानी छावनी विद्या निकेत स्कूल के समीप जय रामेश्वर मंदिर पर आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथाचार्य पं सुरेश शास्त्री ने उपरोक्त भागवत के श्लोक के माध्यम से इस महापुराण के महत्व को बताया।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत में 18 हजार श्लोक हैं, जिसमें से भगवान के मुख से निकले लगभग 15 सौ होंगे, बाकी अन्य श्लोकों में भगवान के भक्त ध्रुव, प्रह्लाद आदि की कथाएं हैं, लेकिन भगवान के भक्तों की कथाएं भी भागवत ही हैं। जो भागवत को सुनता है, वो भी भागवत हो जाता है। जो तन मन धन से भगवान का बन गया वो भागवत ही है। उन्होंने कहा कि कथा का आशय कथ्य यानि किसी ने कहा और किसी न सुना वो कथा है,लेकिन सच यह है कि जो हम संसार की चर्चा करते हैं, वो व्यथा है और जो भगवान की चर्चा करते हैं, जिसे सुनकर मन में ब्रह्म की स्थापना हो जाए, वो कथा है।
उन्होंने कहा कि विशाल भवन मंदिर नहीं कहलाता है,लेकिन छोटे से भवन में यदि भगवान की प्रतिष्ठा हो जाती है तो वह मंदिर बन जाता है।
उन्होंने कहा कि 18 पुराणों में सिर्फ भागवत ऐसा पुराण हैं, जिसमें से 17 पुराणों की रचना वेदव्यास ने की है,लेकिन भागवत पुराण में वही मिलेगा जो वेदों में है। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा को हम जितनी बार सुनते हैें, हर बार नई लगती है।
मंगलाचरण के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी शुभ कार्य को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए मंगलाचरण किया जाता है। जिसका ध्यान करने से आचरण मंगल हो जाता है, ऐसे भगवान का स्मरण मंगलाचरण में किया जाता है, इसलिए राम चरित्र मानस में तुलसीदास ने चौपाई लिखी मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदशरथ अजिर बिहारी। कथा परीक्षत सरोज प्रेम पचौरी ने भागवतजी का पूजन किया। इस मौके पर एपेक्स बैंक के अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव, विवेक शेजवलकर कमल मखीजानी,जंडेल गुर्जर धीर सिंह तोमर लवी खंडेलवाल शैलू चौहान पं जयराम पचौरी, रमेश पचौरी, भूपेंद्र शर्मा, सचिन पचौरी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।