भक्त के जीवन में अज्ञान, अहंकार एवं अन्य विकारों का नाश करते हैं पूर्ण सतगुरु
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ किया गया, जिसमें दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के प्रचारक शिष्यों ने आध्यात्मिक प्रवचनों में कहा कि पूर्ण गुरु भक्त के जीवन में अज्ञान, अहंकार व विकारों का नाश करते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम का वातावरण भक्ति, ज्ञान एवं गुरु महिमा के गुणगान से ओत-प्रोत रहा। आध्यात्मिक प्रवचनों का रसपान करवाते हुए गुरु की महिमा में पूर्ण सतगुरु द्वारा प्रदत्त दिव्य ज्ञान “ब्रह्मज्ञान” का वर्णन किया। डीजेजेएस प्रवक्ताओं ने बताया कि गुरु गीता में भगवान शिव माता पार्वती को गुरु की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए बताते है कि गुरु ही वह दिव्य सत्ता है, जो जीव को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश में स्थापित करती है। सनातन परंपरा में गुरु को साक्षात् परमात्मा का स्वरूप माना गया है। सतगुरु ही वह दिव्य युक्ति प्रदान करते हैं, जिसके माध्यम से साधक अपने भीतर विद्यमान परमात्मा का अनुभव कर सकता है।
अर्थात् गुरु ही ब्रह्मा हैं, जो ज्ञान का सृजन करते हैं, गुरु ही विष्णु हैं जो साधक के जीवन का पालन एवं संरक्षण करते हैं तथा गुरु ही महेश्वर हैं जो अज्ञान, अहंकार और विकारों का नाश करते हैं। इसलिए गुरु को साक्षात् परब्रह्म कहा गया है।
कार्यक्रम में आगे समझाया गया कि यदि मनुष्य इस दुर्लभ मानव शरीर को प्राप्त करके भी ईश्वर की भक्ति और आत्मकल्याण का प्रयास नहीं करता तो उसका जीवन व्यर्थ चला जाता है। मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य दिव्य ज्ञान प्राप्त कर परमात्मा की प्राप्ति करना है। श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कार्यक्रम में कहा कि महापुरुषों का जीवन त्याग, वैराग्य, करुणा और लोककल्याण का संदेश देता है। यदि मनुष्य पूर्ण गुरु के मार्गदर्शन में भक्ति, ध्यान एवं सेवा को अपने जीवन में अपनाए, तो वह भी शिवत्व की ओर अग्रसर हो सकता है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक ध्यान साधना एवं भंडारे द्वारा किया गया।