दलदल में फंसे भैंस के बछड़े को गौ सेवक कल्लू महाराज ने बचाया

दिनारा क्षेत्र के पिछोर तिराहे स्थित अशोक होटल के पास बुधवार को एक बड़ा हादसा टल गया, जब खेत में भरे पानी और दलदल में एक भैंस का बछड़ा फंस गया। जानकारी के अनुसार तेज गर्मी के कारण खेतों में भरे पानी में भैंस और उसका बछड़ा पानी पीने पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक बछड़ा भैंस के सींग में उलझ गया और दलदल में बुरी तरह फंस गया। आसपास मौजूद लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलते ही गौ सेवक कल्लू महाराज तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की मदद से करीब एक घंटे तक लगातार मेहनत कर बछड़े को सुरक्षित बाहर निकाला। दलदल काफी गहरा होने के कारण भैंस और बछड़े दोनों की जान पर खतरा मंडरा रहा था। समय रहते राहत कार्य होने से एक बड़ी दुर्घटना टल गई। गौ सेवक कल्लू महाराज ने बताया कि गर्मी के मौसम में पशु-पक्षियों और जीव-जंतुओं को पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। किसान भाई अच्छी भावना से खेतों में पानी भर देते हैं ताकि जानवर अपनी प्यास बुझा सकें, लेकिन कई बार अधिक पानी और दलदल जानलेवा साबित हो जाता है। उन्होंने कहा कि खेतों में गहरे दलदल बनने से पशु फंस जाते हैं और उनकी जान तक जा सकती है।

कल्लू महाराज ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था अवश्य करें, लेकिन ऐसी जगह करें जहां जमीन मजबूत और सुरक्षित हो। उन्होंने सुझाव दिया कि गांवों और खेतों के आसपास बड़ी पानी की टंकियां बनाई जाएं ताकि गाय, भैंस, बछड़े, पशु-पक्षी और अन्य जीव-जंतु आसानी से पानी पी सकें और किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। उन्होंने कहा कि “जीव-जंतुओं की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ा यज्ञ है। गर्मी में इंसान ही नहीं बल्कि हर जीव प्यासा होता है। यदि हम उनके लिए सुरक्षित पानी और भोजन की व्यवस्था करें तो यह सबसे बड़ी मानव सेवा होगी।”

गौ सेवक कल्लू महाराज ने समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे आगे आकर “प्यास बुझाओ अभियान” चलाएं और गांव-गांव में पानी की स्थायी व्यवस्था करवाएं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास संसाधन और क्षमता है, उन्हें पशु-पक्षियों के जीवन बचाने के लिए आगे आना चाहिए ताकि कोई भी जीव प्यासा या भूखा न रहे। इस घटना के बाद क्षेत्र में गौ सेवक कल्लू महाराज की सराहना की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर मदद नहीं पहुंचती तो भैंस और उसके बछड़े दोनों की जान जा सकती थी। घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और सावधानी दोनों बेहद जरूरी हैं।

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