खजुराहो| मतँगेश्वर की नगरी खजुराहो में शिक्षक दिवस के अवसर पर एक गरिमामय एवं भव्य समारोह का आयोजन किया गया यह कार्यक्रम दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर एवं मतँगेश्वर सेवा समिति खजुराहो के प्रमुख पंडित सुधीर शर्मा के आव्हान पर प्रसिद्ध वुड्स कैफ़े रेस्टोरेंट में सम्पन्न हुआ, जिसमें शिक्षा और संस्कृति के प्रति समर्पण की एक अनूठी झलक देखने को मिली, समारोह की शुरुआत भारतीय संत परंपरा और महापुरुषों के स्मरण से हुई। सर्वप्रथम मतंग ऋषि, सन्यासी बाबा, ब्रह्म बाबा, मतंग धूना (झाड़ू वाले बाबा), परमपूज्य पंडित देव प्रभाकर शास्त्री ( दद्दा जी), आचार्य श्री विद्यासागर महाराज, नारायण महाराज, प्रेमगिरी महाराज और भगवान रजनीश ओशो के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। साथ ही, भूतपूर्व राज्यसभा सांसद स्वर्गीय प्रभात झा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ सेवक स्वर्गीय डॉ. कंछेदी लाल पाठक को भी भावपूर्ण श्रद्धा के साथ याद किया गया, कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में बुंदेलखंड के एकमात्र बेगलेस स्कूल की संचालिका श्रीमती वर्षा चतुर्वेदी को सम्मानित किया गया बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाओं की उपस्थिति ने इस आयोजन की गरिमा को और भी बढ़ा दिया। सम्मान प्राप्त करने के बाद अपने उद्बोधन में श्रीमती चतुर्वेदी ने कहा कि खजुराहो आकर उन्होंने सबसे पहले भगवान मतँगेश्वर के दर्शन किए और उनकी भक्ति का गहन आनंद प्राप्त किया। तत्पश्चात, पंडित सुधीर शर्मा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सम्मिलित होकर उन्हें विशेष संतोष मिला। उन्होंने कहा कि जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ उन्हें और उनके विद्यालय की शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया है, वह उनके जीवन की अविस्मरणीय स्मृतियों में सदा अंकित रहेगा। उन्होंने पंडित शर्मा के सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्हें समाज का प्रेरणास्रोत बताया, इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिनमें बुंदेलखंड बैंक के विजय रजक, परिवर्तन एनजीओ के राकेश राजोरिया, समाजसेविका सपना शुक्ला, खजुराहो भाजपा मंडल अध्यक्ष गौरव सिंह बघेल एवं मण्डल उपाध्यक्ष रविंद्र पाठक, इसरार खान सहित अनेक बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। सभी अतिथियों ने शिक्षकों की महत्ता और समाज निर्माण में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला शिक्षक दिवस के इस आयोजन ने न केवल शिक्षा जगत को गौरवान्वित किया, बल्कि खजुराहो की सांस्कृतिक और सामाजिक परंपरा को भी नई ऊर्जा प्रदान की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने यह संकल्प भी लिया कि समाज में शिक्षा और संस्कारों की ज्योति निरंतर प्रज्वलित रहेगी।