ग्वालियर।आज डिजिटल युग में जानकारी के अनेक माध्यम उपलब्ध हैं, लेकिन पुस्तकों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। विद्यार्थियों को अपने व्यस्त समय में से कुछ समय नियमित रूप से पुस्तकालय में बिताना चाहिए और पुस्तकों का अध्ययन अपनी आदत बनाना चाहिए।पुस्तकें केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण और जीवन को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण साधन हैं। जो किताबें बोलती हैं, वही व्यक्ति भी प्रभावी ढंग से बोलता है। यह बात कुलगुरू प्रो. राजकुमार आचार्य ने मंगलवार को जेयू के ग्रंथालय एवं सूचना विज्ञान अध्ययनशाला में पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस.आर. रंगनाथन की 134वीं जयंती पर अध्यक्षता करते हुए कही।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अशोक जादौन, विशिष्ट अतिथि पंकज नाफडे, डॉ. राजेन्द्र वैद्य एवं प्रदीप कुमार शर्मा तथा मुख्य वक्ता प्रो. जे.एन. गौतम उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ संयोजक हेमंत शर्मा के स्वागत भाषण से हुआ। मुख्य अतिथि अशोक जादौन ने कहा कि आज की पीढ़ी को पुस्तकों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। युवाओं को वेदों सहित भारतीय ज्ञान परंपरा की जानकारी हासिल कर पुस्तकालयों में समय बिताना चाहिए। पंकज नाफडे ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान का मंदिर और पुस्तक जीवन का आधार है। डॉ. राजेन्द्र वैद्य ने कहा कि पुस्तकों से जीवन को सही दिशा मिलती है, जबकि प्रदीप कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों से नियमित रूप से पुस्तकालय का उपयोग करने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता प्रो. जे.एन. गौतम ने डॉ. एस.आर. रंगनाथन के जीवन एवं पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। संयोजक प्रो. हेमंत शर्मा ने कहा कि पुस्तकालय एक विज्ञान संस्था है और शिक्षकों का शिक्षक लाइब्रेरियन कहलाता है।इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी- कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।