खटारा स्कूल बस के टूटे फर्श से मासूम छात्रा गिरकर पहिए के नीचे आई, थमी सांसें
आगरा। जनपद के एत्मादपुर थाना क्षेत्र में बुधवार को एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। आरबीएस स्कूल की जर्जर बस ने नौ साल की मासूम छात्रा की जिंदगी निगल ली। स्कूल से छुट्टी के बाद घर लौट रही कक्षा 9वीं की छात्रा नैना पुत्री ब्रह्मजीत निवासी नगला लाले अचानक बस के टूटे हुए फर्श से नीचे सड़क पर जा गिरी और देखते ही देखते बस का पहिया उसके ऊपर से गुजर गया। कुछ ही सेकंड में मासूम की सांसें थम गईं। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन और परिवहन तंत्र की लापरवाही की भयावह कहानी बनकर सामने आया है।
बुधवार दोपहर स्कूल की छुट्टी के बाद आरबीएस स्कूल, एत्मादपुर की बस बच्चों को लेकर गांवों की ओर लौट रही थी। बस में सवार बच्चे रोज की तरह सीटों पर बैठे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि बस का फर्श ही मौत का जाल बन चुका है। बताया जा रहा है कि बस का फर्श लंबे समय से गला हुआ और जर्जर था। उस हिस्से पर केवल एक लकड़ी का पटरा डालकर उसे ढका गया था। रास्ते में झटका लगते ही पटरा खिसक गया और उसी टूटे हिस्से से नैना सीधे सड़क पर जा गिरी। बस के पीछे वाले पहिए ने पल भर में मासूम को कुचल दिया। जब तक बच्चों ने शोर मचाया और बस रुकवाई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बस में ही पढ़ने वाली नैना की बड़ी बहन किसी तरह घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। खबर मिलते ही परिवार में चीत्कार और कोहराम मच गया। मां को जब अपनी नौ साल की बेटी की मौत की खबर मिली तो वह सदमे से बेहोश हो गई। गांव के लोग और परिजन दौड़ते-भागते अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें अपनी लाडली का निर्जीव शव ही मिला। नगला लाले गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई। जिसने भी सुना, उसकी आंखें नम हो गईं। पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।
यह हादसा कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही खटारा स्कूल बसों की भयावह हकीकत को सामने ले आया है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में निजी स्कूल खुल चुके हैं और आसपास के गांवों के बच्चों को लाने-ले जाने के लिए पुरानी और जर्जर बसें सड़कों पर दौड़ाई जा रही हैं। इन बसों की हालत इतनी खराब होती है कि कई में फर्श तक गल चुके हैं, फिर भी उन्हें बच्चों से भरा जा रहा है। सवाल यह है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा मुनाफे को क्यों प्राथमिकता दे रहा है? स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर परिवहन विभाग समय-समय पर इन बसों की कड़ी जांच करता, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टल सकता था। स्कूल की बस का फर्श इतना कमजोर था कि किसी भी समय हादसा हो सकता था। इसके बावजूद वह बच्चों को ढोती रही।
मासूम की मौत से गूंजा सवाल- जिम्मेदार कौन?
नौ साल की मासूम नैना की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। गांव के लोग स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभागों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसी खटारा बसें फिर किसी और मासूम की जिंदगी छीन लेंगी।