अनुसंधान तभी सार्थक है जब उसका लाभ आमजन तक पहुंचेः प्रो. कन्हेरे
ग्वालियर। भारत की धरती पर जीवन विज्ञान की जड़ें अत्यंत प्राचीन रही हैं। हमारे वेदों, उपनिषदों, आयुर्वेद और चरक-सुश्रुत संहिताओं में जैविक ज्ञान का अदभुत संकलन मिलता है। लाइफ साइंसेज का संबंध केवल चिकित्सा या प्रयोगशाला अनुसंधान से नहीं है। यह कृषि, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। यह बात बुधवार को शुल्क विनियमन समिति मध्यप्रदेश शासन के अध्यक्ष प्रो.रविन्द्र कन्हेरे ने जेयू में “लाइफ साइंसेजः प्राचीन से आधुनिक युग तक का सफर” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही।
कार्यक्रम में प्रो. अखिलेश के. पांडे ने कहा कि जीवन विज्ञान का विकास एक सतत यात्रा है, जो प्राचीन वैदिक ज्ञान से शुरू होकर आज जीनोमिक्स और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी तक पहुंच चुका है। अमिटी यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रो. राजेश सिंह तोमर ने कहा कि 21वीं सदी जीवन विज्ञान की सदी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु डॉ. राजकुमार आचार्य ने कहा कि जीवन विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित विषय नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के विकास का आधार है। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में आयुर्वेद, वनस्पति विज्ञान और जैव विविधता के संरक्षण का जो दृष्टिकोण मिलता है, वह आज के आधुनिक शोध के लिए भी मार्गदर्शक है। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों को शाल श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात स्मारिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए जिसमें 80 से अधिक शोधार्थियों ने शोध पत्रों का वाचन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ.मधु गुप्ता ने किया। आभार व्यक्त डॉ.सपन पटेल ने किया।
इस अवसर पर प्रो. एमके गुप्ता, डॉ. सपन पटेल, प्रो. डीएन गोस्वामी, प्रो. विवेक बापट, प्रो. जेएन गौतम,प्रो.आईके पात्रो, प्रो. एसएन महापात्रा, प्रो. एसके सिंह, प्रो. एसके श्रीवास्तव, प्रो. हेमंत शर्मा, प्रो. मुकुल तेलंग,प्रो.शांतिदेव सिसौदिया, प्रो.संजय कुलश्रेष्ठ, प्रो.राधा तोमर, प्रो. महेंद्र गुप्ता, डॉ. मनोज शर्मा, डॉ. समीर भाग्यवंत, डॉ. निमिषा जादौन, डॉ. स्वर्णा परमार, प्रो. डीसी गुप्ता, डॉ. नवनीत गरूड़, प्रो. राजेंद्र खटीक, प्रो. संजय कुलश्रेष्ठ, डॉ. सतेंद्र सिकरवार, डॉ.पीके जैन सहित शोधार्थी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित थे।
सोशल मीडिया एंड ह्यूमन लाइफ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी 20 से
ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में 20 एवं 21 फरवरी को ‘सोशल मीडिया एंड ह्यूमन लाइफ’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इस संगोष्ठी का आयोजन सेंटर फॉर स्टडीज इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन विभाग द्वारा पीएम-उषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के गालव सभागार में संपन्न होगा।
कार्यक्रम में सोशल मीडिया और समाज, युवाओं पर प्रभाव, नैतिक चुनौतियां, फेक न्यूज, डिजिटल जिम्मेदारी तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे समकालीन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। संगोष्ठी के संरक्षक कुलगुरु डॉ. राजकुमार आचार्य हैं, जबकि कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा कन्वीनर की भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम संयोजक प्रो. एस.एन. महापात्रा ने अधिक से अधिक शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से सहभागिता का आह्वान किया।